अधीर रंजन चौधरी का NCP सांसदों पर निशाना, कहा- 'अवसरवादी भगोड़ों' की सदस्यता खत्म हो
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने उन 20 एनसीपीआई सांसदों की कड़ी आलोचना की है, जिन्हें लोकसभा स्पीकर ने नोटिस जारी किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, चौधरी ने इन सांसदों को 'अवसरवादी' और…
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने उन 20 एनसीपीआई सांसदों की कड़ी आलोचना की है, जिन्हें लोकसभा स्पीकर ने नोटिस जारी किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, चौधरी ने इन सांसदों को 'अवसरवादी' और 'भगोड़ा' करार देते हुए उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने जनता से वोट लेने के बाद सत्ता और सरकारी सुविधाओं के लालच में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का साथ पकड़ लिया।
चौधरी ने मुर्शिदाबाद में कहा, "मैं चाहता हूं कि ऐसे नेताओं की सदस्यता समाप्त हो और उन्हें दोबारा चुनाव लड़कर सदन में आने के लिए मजबूर किया जाए। अगर इन नेताओं में हिम्मत है तो वे सदस्यता छोड़कर जनता के बीच जाएं और चुनाव जीतकर दोबारा संसद पहुंचें।" उन्होंने यह भी कहा कि सीधे भाजपा में जाने में झिझक के कारण इन नेताओं ने एनसीपीआई को एक माध्यम के तौर पर इस्तेमाल किया।
नेपाल आपदा पर चिंता और बचाव की अपील
नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए अधीर रंजन चौधरी ने इसे एक गंभीर और दर्दनाक घटना बताया। उन्होंने कहा कि तिब्बत में भूकंप के बाद हुए भूस्खलन, हिमस्खलन और नदियों के उफान ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है, जिसका असर चीन के सीमावर्ती इलाकों पर भी पड़ा है।
चौधरी ने मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय श्रद्धालुओं और पर्यटकों के फंसे होने पर चिंता जताते हुए राहत एवं बचाव अभियान में तेजी लाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत सरकार फंसे हुए भारतीयों को जल्द सुरक्षित निकालने के लिए प्रयास जारी रखेगी। उन्होंने भारत के सीमावर्ती राज्यों, विशेषकर बिहार और पश्चिम बंगाल में बाढ़ की आशंका जताते हुए प्रशासन को समय पर तैयारी करने के लिए भी आगाह किया।
न्यूयॉर्क विवाद पर केंद्र को सलाह
न्यूयॉर्क में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के एक कार्यक्रम का विरोध होने के मुद्दे पर भी अधीर रंजन चौधरी ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार को न्यूयॉर्क के मेयर के बयान से कोई आपत्ति है, तो उसे यह मामला अमेरिकी प्रशासन और तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समक्ष उठाना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि न्यूयॉर्क में मेयर का चुनाव धर्म के आधार पर नहीं होता है।
इनपुट: IANS



