नागालैंड: पूर्वी जिलों के लिए 62-सदस्यीय नई अथॉरिटी का प्रस्ताव, विधानसभा में संशोधित बिल पेश
नागालैंड के छह पूर्वी जिलों में व्यापक शक्तियों के साथ एक नई क्षेत्रीय अथॉरिटी बनाने का रास्ता साफ होता दिख रहा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में संशोधि…
नागालैंड के छह पूर्वी जिलों में व्यापक शक्तियों के साथ एक नई क्षेत्रीय अथॉरिटी बनाने का रास्ता साफ होता दिख रहा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में संशोधित 'फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (FNTA) बिल, 2026' पेश किया। इस बिल का उद्देश्य क्षेत्र के विकास और प्रशासन को एक नई दिशा देना है।
यह संशोधित बिल 26 मार्च को पारित पिछले बिल की जगह लेगा, जिसे सदन ने ध्वनि मत से वापस ले लिया था। उपमुख्यमंत्री वाई. पैटन द्वारा पेश किए गए इस नए मसौदे पर 3 सितंबर को विचार और मतदान होने की उम्मीद है। स्पीकर शेरिंगेन लोंगकुमर ने सदस्यों को किसी भी संशोधन या स्पष्टीकरण के लिए बुधवार दोपहर 2 बजे तक का समय दिया है।
क्या है प्रस्तावित अथॉरिटी की संरचना?
प्रस्तावित FNTA में कुल 62 सदस्य होंगे। इनमें से 40 सदस्य सीधे चुनाव के जरिए आएंगे, जिनके लिए एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। राज्यपाल दो सदस्यों को उन जनजातियों से नामित करेंगे जिनका प्रतिनिधित्व कम है। इसके अलावा, फ्रंटियर नागालैंड क्षेत्र से राज्य के 20 विधायक भी पदेन सदस्य होंगे, लेकिन उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं होगा। इस अथॉरिटी का कार्यकाल पांच साल का होगा और इसके मुखिया चीफ एग्जीक्यूटिव मेंबर (सीईएम) होंगे।
किन जिलों और विषयों को मिलेगी स्वायत्तता?
यह अथॉरिटी तुएनसांग, मोन, लोंगलेंग, किफायर, नोकलाक और शमाटोर जिलों को कवर करेगी। इसे कृषि, स्कूली शिक्षा (उच्च माध्यमिक तक), स्वास्थ्य (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक), ग्रामीण विकास, पर्यटन, और व्यापार समेत कुल 46 विषयों पर विधायी, कार्यकारी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां मिलेंगी। यह व्यवस्था केंद्र, नागालैंड सरकार और ईस्टर्न नागालैंड पीपल्स ऑर्गनाइज़ेशन (ईएनपीओ) के बीच 5 फरवरी, 2026 को हुए समझौता ज्ञापन (एमओए) पर आधारित है।
प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था
FNTA के पास सौंपे गए विषयों पर कानून बनाने का अधिकार होगा, लेकिन उन्हें लागू करने से पहले राज्यपाल की मंजूरी अनिवार्य होगी। अगर राज्य और अथॉरिटी के कानूनों में कोई टकराव होता है, तो राज्य का कानून ही मान्य होगा। एक आईएएस अधिकारी, जो अतिरिक्त मुख्य सचिव रैंक का हो, इसके मुख्य कार्यकारी सचिव (सीईएस) के रूप में काम करेगा। अथॉरिटी को विकास कार्यों के लिए सालाना फंड मिलेगा और राज्य के बजट में इसके लिए अलग से प्रावधान होगा, जिसकी ऑडिटिंग सीएजी करेगी।
राज्य सरकार की भूमिका और भविष्य की योजनाएं
हालांकि, भू-विज्ञान, खनन और बड़े पर्यटन प्रोजेक्ट जैसे कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्र पूरी तरह से राज्य सरकार के नियंत्रण में रहेंगे। पुलिस प्रशासन की कमान भी राज्य सरकार के हाथ में ही होगी, जिसके लिए एक आईजीपी-रैंक का अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। इस बिल के तहत केंद्र सरकार क्षेत्र के लिए विशेष विकास अनुदान भी दे सकती है, जिससे नागालैंड यूनिवर्सिटी का एक और कैंपस, मोन मेडिकल कॉलेज का उन्नयन, एयरपोर्ट और बेहतर सड़कों जैसी परियोजनाओं को साकार किया जा सकता है। FNTA के कामकाज की 10 साल बाद समीक्षा की जाएगी।
इनपुट: IANS



