गुरूवार, 30 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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गुजरात बना मैंग्रोव संरक्षण का राष्ट्रीय मॉडल, 'मिष्टी' योजना के तहत 3 साल में 40 हजार हेक्टेयर का विस्तार

जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से तटीय इलाकों को बचाने और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में गुजरात देश के लिए एक मिसाल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य, केंद्र सरकार की…

गुजरात बना मैंग्रोव संरक्षण का राष्ट्रीय मॉडल, 'मिष्टी' योजना के तहत 3 साल में 40 हजार हेक्टेयर का विस्तार
(फोटो: IANS)

जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से तटीय इलाकों को बचाने और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में गुजरात देश के लिए एक मिसाल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य, केंद्र सरकार की 'मिष्टी' योजना को लागू करने में सबसे आगे निकल गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में ही राज्य में लगभग 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मैंग्रोव का वृक्षारोपण और पुनर्स्थापन किया गया है।

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यह उपलब्धि गुजरात को मैंग्रोव संरक्षण और विस्तार के क्षेत्र में एक राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित करती है। गुजरात के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) डॉ. जयपाल सिंह ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत बहुत अच्छा काम हुआ है। उन्होंने कहा, "भारत में सालभर में हुए कुल काम का लगभग 85 प्रतिशत गुजरात राज्य में हुआ है और पिछले तीन सालों में हमने वन विभाग के जरिए 40,000 हेक्टेयर से ज्यादा एरिया में मैंग्रोव प्लांटेशन पूरा किया है।"

तटीय सुरक्षा और अर्थव्यवस्था का आधार

मैंग्रोव को तटीय क्षेत्रों के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच माना जाता है। ये न सिर्फ समुद्री जैव विविधता को बढ़ाते हैं, बल्कि मछली उत्पादन में भी मदद करते हैं, जिससे स्थानीय समुदायों की आजीविका और ब्लू इकोनॉमी को मजबूती मिलती है। जामनगर के एक किसान, डी.एम. दाफदा, इसके महत्व को समझाते हुए कहते हैं, "जब मैंग्रोव के पत्ते पीले पड़कर नीचे गिर जाते हैं तो उनसे उगने वाले कीड़े छोटी मछलियों के आहार बनते हैं, जो एक जीव का खाना होता है। यही छोटी मछली से लेकर बड़ी मछली तक की सारी फूड चेन बनती है।"

गुजरात के महत्वाकांक्षी लक्ष्य

क्षेत्रफल के हिसाब से गुजरात देश का दूसरा सबसे बड़ा मैंग्रोव कवर वाला राज्य है, जहाँ भारत के कुल मैंग्रोव का लगभग 23.32 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है। राज्य सरकार ने भविष्य के लिए भी बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं। वर्ष 2035 तक मैंग्रोव क्षेत्र को मौजूदा 1,164 वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर 1,500 वर्ग किलोमीटर करने का लक्ष्य रखा गया है। यह मॉडल साबित करता है कि सरकार, वैज्ञानिकों और स्थानीय समुदायों की साझेदारी से पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है।

इनपुट: IANS

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