ठाणे पुलिस ने इक़बाल कासकर और छोटा शकील पर मकोका लगाया

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महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ़ ऑर्गनाइज्ड ऐक्ट के तहत भगोड़े अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के इक़बाल कासकर, गैंगस्टर छोटा शकील साथ ही तीन और लोगो पर मुकदमा चलाया जाएगा | ठाणे पुलिस ने इन लोगो पर जबरन वसूली करने के लिए मकोका लगाया है |

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि ठाणे के कासरवाड़ावली पुलिस स्टेशन में एक बिल्डर की शिकायत पर जबरन वसूली के लिए इक़बाल कासकर और अन्य साथिओ पर मकोका लगाया गया | मकोका लगाने के बाद अब कासकर समेत उसके साथिओ को जमानत मिलना लगभग नामुमकिन हो जाएगा | पुलिस इससे पहले कासकर के दो साथिओ जमाल अली सय्यद और मुमताज शेख को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है |

पुलिस को पूछताछ के दौरान बड़ा खुलासा हुआ की दाऊद का करीबी गैंगस्टर छोटा शकील भी जबरन वसूली मामले में शामिल था | पुलिस के अधिकारियो ने बताया कि शकील ने दाऊद की तरफ से कथित तौर पर बिल्डरों और कारोबारियों से धमकी देकर पैसे वसूल ने का प्रयास किया |

इस मामले में जांच करते वक्त जबरन वसूली विरोधी ब्रांच के अधिकारियो ने बोरीवली मटका जुआ किंग और कारोबारी पंकज गांगर को भी गिरफ्तार किया | उस पर आरोप है कि वो हवाला के जरिए हर महीने 10 से 15 लाख रूपए शकील को भेजा करता था | ठाणे पुलिस जांच की शुरुवात से ही मकोका लगाने पर विचार कर रही थी कि क्या इस मामले में मकोका लगाया जा सकता है | एक अधिकारी ने कहा कि इस मामले में शकील की भूमिका स्थापित हो चुकी है | अब उसके खिलाफ सख्त कानून के तहत करवाई करना आसान हो जाएगा |

क्या है मकोका (Maharashtra Control of Organised Act, 1999)?

संगठीत अपराध एवं आतंकवाद नियंत्रण के लिए महाराष्ट्र सरकार ने इस ऐक्ट को 1999 में बनाया था | मकोका लगने से अपराधी को जमानत मिलाना बहोत मुश्किल होता है | मकोका लगाने के लिए आरोपी ने 10 साल के दौरान दो संगठीत अपराधों में शामिल होना जरुरी है | साथ ही इस अपराध में दो लोगो का शामिल होना भी जरुरी होता है | इसके आलावा आरोपी पर एफआईआर के बाद चार्जशीट भी दायर होना जरुरी है | किसी के खिलाफ मकोका लगाने से पहले पुलिस को अपर आयुक्त से मंजूरी भी लेनी पड़ती है | पुलिस को 180 दिनों के अंदर चार्जशीट दायर करनी पड़ती है, नहीं तो आरोपी को जमानत मिल सकती है | मकोका एक बहोत ही सख्त कानून है | भारतीय दंड सहिंता के प्रावधानों में पुलिस को चार्जशीट दायर करने के लिए 60 से 80 दिनों का वक्त मिलता है वही मकोका के तहत यही वक्त 180 दिनों का होता है | मकोका में पुलिस को आरोपी की रिमांड 30 दिनों के लिए मिल सकती है वही भारतीय दंड संहिता के अनुसार आरोपी को महज 15 दिन की ही पुलिस रिमांड मिल सकती है | मकोका में न्यूनतम सजा 5 साल की जेल होती है और अधिकतम सजा फांसी की होती है |

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