वंदे मातरम पर प्रस्तावित बिल: मौलाना साजिद रशीदी ने इसे 'UCC से भी बड़ा हथियार' बताया
मौलाना साजिद रशीदी ने वंदे मातरम पर प्रस्तावित बिल को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इस बिल को मुसलमानों के खिलाफ एक साजिश करार देते हुए कहा कि यह यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) से भी बड़ा…
मौलाना साजिद रशीदी ने वंदे मातरम पर प्रस्तावित बिल को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इस बिल को मुसलमानों के खिलाफ एक साजिश करार देते हुए कहा कि यह यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) से भी बड़ा हथियार है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, रशीदी ने आरोप लगाया कि सरकार एक खास समुदाय को निशाना बना रही है।
रशीदी ने अपने बयान में कहा, "सरकार मुसलमान को नागरिक नहीं मानती, उसको मुसलमानों का वोट नहीं चाहिए और मुसलमानों का सपोर्ट नहीं चाहिए। इसीलिए सरकार की ओर से वंदे मातरम बिल पर सजा का प्रावधान कर रही है। अब जो वंदे मातरम गाएगा वही देशप्रेमी होगा और जिसको वंदे मातरम गाने से परहेज है, वो देशद्रोही होगा।"
आस्था और इतिहास का हवाला
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि मुसलमानों का रुख इस मामले में बहुत पुराना और स्पष्ट है। उन्होंने कहा, "मुसलमानों ने वर्ष 1937 में ही कांग्रेस को बोल दिया था कि हम नहीं गाएंगे; यह हमारी आस्था के खिलाफ है।" उन्होंने अपना पक्ष दोहराते हुए कहा कि वंदे मातरम की आखिरी छह पंक्तियां मुसलमान नहीं गाएगा। रशीदी ने कहा, "मुसलमान जान दे सकता है, ईमान नहीं दे सकता। इसलिए जो भी चीज हमारी आस्था के खिलाफ होगी, चाहे बिल आए या सजा का प्रावधान किया जाए, हमें उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।"
सरकार की मंशा पर सवाल
रशीदी ने सरकार पर देश के बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार बेरोजगारी, शिक्षा और महंगाई जैसे अहम विषयों पर बात नहीं करना चाहती और देश में नफरत फैलाना चाहती है।
यह गौरतलब है कि सोमवार को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में काजी मोहम्मद अरशद ने इस प्रस्तावित विधेयक का समर्थन किया था। IANS से बातचीत में उन्होंने इसे देश की गरिमा और सम्मान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा था, "वंदे मातरम देशहित और राष्ट्र की एकता का प्रतीक है। ...यदि सरकार इसके सम्मान की रक्षा के लिए विधेयक लाना चाहती है, तो यह एक सकारात्मक पहल है।"
इनपुट: IANS



