वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्याज दरों को लेकर असमंजस और भू-राजनीतिक तनावों के चलते भारतीय शेयर बाजार लगातार तीसरे सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ। हालांकि, समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, शुक्रवार को बाजार…
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्याज दरों को लेकर असमंजस और भू-राजनीतिक तनावों के चलते भारतीय शेयर बाजार लगातार तीसरे सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ। हालांकि, समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, शुक्रवार को बाजार में अच्छी रिकवरी देखने को मिली, लेकिन साप्ताहिक स्तर पर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में ही रहे।
समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 0.36% कमजोर हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 0.31% टूटा। शुक्रवार के अंतिम कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 330 अंक (0.43%) चढ़कर 77,264 पर और निफ्टी 0.35% की बढ़त के साथ 24,175 के स्तर पर बंद हुआ था।
बाजार में उतार-चढ़ाव की वजहें
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में इस अस्थिरता के पीछे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार रहे। अमेरिका में फेडरल रिजर्व की भविष्य की नीतियों को लेकर निवेशकों में सतर्कता का माहौल है, जिसका असर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के प्रवाह पर पड़ सकता है। इसके अलावा, वायदा एवं विकल्प (F&O) शेयरों में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन लागू होने से भी बाजार की धारणा प्रभावित हुई, जिससे बड़े शेयरों में कीमतों को लेकर अल्पकालिक अस्थिरता बढ़ी।
किन सेक्टर्स में रही तेजी और मंदी?
इस सप्ताह आईटी सेक्टर सबसे मजबूत रहा। वैश्विक स्तर पर एनवीडिया (Nvidia) के बेहतर नतीजों और सकारात्मक संकेतों के दम पर निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब 2.45% की जोरदार बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा, दवा और कुछ धातु कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई। वहीं दूसरी तरफ, चुनिंदा बैंकिंग और उपभोक्ता क्षेत्र के शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा, जिससे बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा।
कच्चे तेल और तकनीकी स्तरों का विश्लेषण
बाजार के लिए एक राहत की खबर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी रही। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही में सुधार की उम्मीदों के बीच ब्रेंट क्रूड का भाव 4% से ज्यादा गिरकर लगभग 88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। हालांकि, विशेषज्ञों ने चेताया है कि पश्चिम एशिया में तनाव बने रहने से कीमतों में फिर उछाल आ सकता है।
तकनीकी चार्ट पर देखें तो निफ्टी के लिए 24,000 से 23,800 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है। वहीं, ऊपर की तरफ 24,300 से 24,400 के स्तर पर इसे बाधा का सामना करना पड़ सकता है। बैंक निफ्टी के लिए 56,900-56,500 का स्तर सपोर्ट और 57,800-58,000 का स्तर रेजिस्टेंस बना हुआ है।
आगे किन बातों पर रहेगी नजर?
आने वाले सप्ताह में बाजार की दिशा घरेलू और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों से तय होगी। निवेशक भारत के जीडीपी आंकड़ों पर नजर रखेंगे। इसके अलावा, 4 सितंबर को आने वाली अमेरिका की अगस्त महीने की गैर-कृषि रोजगार रिपोर्ट भी बाजार के लिए एक बड़ा संकेत होगी। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक परिदृश्य साफ नहीं होता, बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
इनपुट: IANS



