शनिवार, 29 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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बलूचिस्तान: बाग़ान जलाने की मुख्यमंत्री की धमकी पर मानवाधिकार संगठन ने उठाए गंभीर सवाल

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मानवाधिकारों की स्थिति एक बार फिर बहस के केंद्र में है। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने प्रांत के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती के उस बयान पर गहरी चिंता जताई है, जिसमें…

बलूचिस्तान: बाग़ान जलाने की मुख्यमंत्री की धमकी पर मानवाधिकार संगठन ने उठाए गंभीर सवाल
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मानवाधिकारों की स्थिति एक बार फिर बहस के केंद्र में है। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने प्रांत के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती के उस बयान पर गहरी चिंता जताई है, जिसमें उन्होंने मस्तुंग जिले में स्थानीय लोगों के बागानों को "जलाने और ध्वस्त करने" की चेतावनी दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, संगठन ने इसे मौलिक मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया है।

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बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (BVJ) नामक मानवाधिकार संगठन ने शनिवार को मुख्यमंत्री बुगती की टिप्पणी को "बेहद चिंताजनक और निंदनीय" करार दिया। संगठन ने कहा कि नागरिकों की संपत्ति और उनकी आजीविका के साधनों को निशाना बनाने की यह धमकी संपत्ति और आजीविका के अधिकार को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करती है।

क्या था मुख्यमंत्री का बयान?

डेली दुनिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने शुक्रवार को क्वेटा के सेंट्रल पुलिस ऑफिस में एक कार्यक्रम में यह विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर मस्तुंग के बागानों से प्रांतीय गृह मंत्री या सुरक्षा बलों पर कोई हमला होता है, तो संबंधित बागान मालिकों को भी हमलावरों का मददगार माना जाएगा और उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।

बुगती ने यह भी कहा कि अगर निजी संपत्तियों का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए जारी रहता है, तो सरकार के पास दो रास्ते होंगे। पहला, बड़े पैमाने पर स्थानीय लोगों को वहां से हटाकर कहीं और बसाना। दूसरा, ऐसे बागानों को "खत्म" कर देना।

सामूहिक दंड का आरोप

BVJ का कहना है कि बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति पहले से ही चिंताजनक है। ऐसे में बागानों को जलाने की धमकी न केवल लोगों की आजीविका को खतरे में डालेगी, बल्कि इसे स्थानीय आबादी पर सामूहिक दबाव या सामूहिक दंड के तौर पर भी देखा जा सकता है। संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों से नागरिकों को डराने, उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या उन्हें सामूहिक दंड देने जैसी किसी भी कार्रवाई से बचने की अपील की है।

कराची में भूमि पर कब्जे का भी आरोप

इसी बीच, बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) ने कराची के मलिर जिले में एक और गंभीर आरोप लगाया है। संगठन के अनुसार, "एजुकेशन सिटी" परियोजना के नाम पर पाकिस्तानी अधिकारी स्थानीय बलूच समुदाय की कृषि भूमि पर कब्जा कर रहे हैं। BYC ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे "अस्वीकार्य" बताया और कहा कि यह उनकी ऐतिहासिक पहचान को कमजोर करने की कोशिश है।

BYC ने दावा किया कि यह परियोजना मलिर के छह गांवों की करीब 20,000 एकड़ भूमि को प्रभावित कर सकती है। इसके दायरे में 80 से अधिक बस्तियां, प्राचीन कब्रिस्तान और ऐतिहासिक स्थल भी आ रहे हैं। संगठन के मुताबिक, तत्काल 1,000 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया ने स्थानीय लोगों के भूमि अधिकारों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।

इनपुट: IANS

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