इस्लामिक कानून की मांग पर मौलाना खालिद रशीद की दो टूक, कहा- यह देश सिर्फ संविधान से चलेगा
भारत में इस्लामिक कानून लागू करने की मांग वाले एक बयान पर इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस तरह के बयानों को देश में अस्वीकार्य…
भारत में इस्लामिक कानून लागू करने की मांग वाले एक बयान पर इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस तरह के बयानों को देश में अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि भारत केवल अपने संविधान के अनुसार ही चलेगा। समाचार एजेंसी IANS से शनिवार को हुई बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के हर नागरिक को अपने धर्म और पर्सनल लॉ का पालन करने की आजादी है, लेकिन यह सब संविधान के दायरे में ही सीमित है।
यह पूरा विवाद ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी के एक बयान से शुरू हुआ था। शुक्रवार को उन्होंने कहा था, "जब तक इस देश में इस्लामिक कानून लागू नहीं होता, तब तक रेप, अपराध, भ्रष्टाचार और ऐसी अन्य चीजों को खत्म नहीं किया जा सकता।" उन्होंने इस्लामिक देशों का उदाहरण देते हुए दावा किया था कि वहां लोग खुशहाल जीवन जी रहे हैं क्योंकि वहां चोरी, बलात्कार या भ्रष्टाचार नहीं होता।
संविधान सर्वोच्च, कानून पर्याप्त
मौलाना साजिद रशीदी के इसी बयान पर अपनी राय रखते हुए मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी यह स्पष्ट कर चुका है कि पर्सनल लॉ की भी अपनी सीमाएं हैं और वे संविधान के अधीन हैं। उन्होंने कहा, "लिहाजा इस तरीके के बयानों की अपने मुल्क में कोई जगह नहीं है।"
देश में बलात्कार जैसे अपराधों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि इसे रोकने के लिए पहले से ही पर्याप्त कानून मौजूद हैं। उनका मानना है कि धार्मिक नेताओं को समाज में मौजूद बुराइयों को दूर करने के लिए प्रयास करना चाहिए। मौलाना खालिद रशीद ने जोर दिया कि जब तक लोगों को सही शिक्षा और संस्कार नहीं मिलेंगे, तब तक ऐसे अपराध होते रहेंगे।
इनपुट: IANS



