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मणिपुर: प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन KCP को बड़ा झटका, 46 सदस्यों ने हथियारों समेत किया आत्मसमर्पण

मणिपुर में शांति बहाली की कोशिशों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। राज्य के एक प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन, कांगलेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी (पीपुल्स वॉर ग्रुप-KCP) के 46 सक्रिय सदस्यों ने मंगलवार को हिंसा का…

मणिपुर: प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन KCP को बड़ा झटका, 46 सदस्यों ने हथियारों समेत किया आत्मसमर्पण
(फोटो: IANS)

मणिपुर में शांति बहाली की कोशिशों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। राज्य के एक प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन, कांगलेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी (पीपुल्स वॉर ग्रुप-KCP) के 46 सक्रिय सदस्यों ने मंगलवार को हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी लोगों का स्वागत किया।

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यह आत्मसमर्पण समारोह इम्फाल पूर्वी जिले के मण्ट्रीपुखरी गैरीसन में आयोजित किया गया। सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, यह इस संगठन के इतिहास में सबसे बड़े आत्मसमर्पणों में से एक है, क्योंकि इससे पहले केवल छोटे-छोटे समूहों में ही सदस्यों ने हथियार डाले थे।

जमा कराए गए हथियार और गोला-बारूद

आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों ने अपने साथ बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री भी सुरक्षा बलों को सौंपी। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि जमा किए गए 28 अत्याधुनिक हथियारों में एके राइफल, इंसास राइफल, कार्बाइन मशीन गन और रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड लॉन्चर जैसे घातक हथियार शामिल हैं। इसके अलावा, 303 राइफलें, पिस्तौल, डबल बैरल बंदूकें, सेल्फ लोडिंग राइफल और बड़ी मात्रा में मैगज़ीन व गोला-बारूद भी जमा कराए गए।

KCP संगठन और आत्मसमर्पण का महत्व

कांगलेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना 14 अप्रैल 1980 को वाई. इबोहानबी और इबोपिशाक ने की थी, लेकिन बाद में यह कई गुटों में बंट गया। इनमें पीपुल्स वॉर ग्रुप को सबसे सक्रिय और हिंसक माना जाता रहा है, जो इम्फाल पूर्व, इम्फाल पश्चिम और काकचिंग जिलों में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देता था। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस घटना का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि आत्मसमर्पण करने वालों में से कोई भी सदस्य पहले किसी शांति समझौते का हिस्सा नहीं था और सभी ने स्वेच्छा से यह कदम उठाया है।

सुरक्षा बलों का सफल अभियान

इस कामयाबी को असम राइफल्स, मणिपुर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के कई हफ्तों से चल रहे संयुक्त अभियान का नतीजा माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस घटना से संगठन की क्षमता और प्रभाव को गंभीर झटका लगा है, जिससे राज्य में शांति प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी और रुकी हुई विकास परियोजनाओं को गति देने में मदद मिलेगी। आत्मसमर्पण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के अलावा राज्य के गृह मंत्री, मुख्य सचिव, सुरक्षा सलाहकार और सेना व पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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