खड़गे के बयान पर संसद में हंगामा: भाजपा ने 'अपमानजनक भाषा' का आरोप लगाया, विपक्ष ने किया बचाव
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक बयान को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों ने खड़गे के शब्दों पर…
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक बयान को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों ने खड़गे के शब्दों पर कड़ी आपत्ति जताई है, जबकि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने उनके बचाव में अपनी दलीलें पेश की हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह विवाद पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह के संदर्भ में की गई एक टिप्पणी से शुरू हुआ।
भाजपा ने आरोप लगाया है कि खड़गे ने सदन में 'बेहद आपत्तिजनक भाषा' का इस्तेमाल किया। पार्टी के सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राज्यसभा की कार्यवाही को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि खड़गे की टिप्पणी के खिलाफ भाजपा सांसदों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद उन्हें अपने बयान में संशोधन करना पड़ा। त्रिवेदी ने इसे कांग्रेस नेतृत्व की मानसिकता का परिचायक बताया।
सरकार का तीखा पलटवार
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि खड़गे ने विधेयक पर सार्थक चर्चा करने के बजाय अपशब्दों का इस्तेमाल किया और "मैं उन्हें यहां घसीटकर लाऊंगा" जैसी बात कही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष सदन में मनुस्मृति की एक "नकली प्रति" लेकर आए थे। वहीं, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि खड़गे को सरकार की स्थिरता की चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार के पास स्पष्ट बहुमत है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष को अपनी स्थिति मजबूत करने पर ध्यान देने की सलाह दी।
विपक्ष ने किया खड़गे का बचाव
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने मल्लिकार्जुन खड़गे का बचाव करते हुए कहा कि उनके बयान में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं था। उन्होंने खड़गे के शब्दों का आशय स्पष्ट करते हुए कहा, "हम आपको आमंत्रित कर रहे हैं, आपको आना चाहिए। जहां आपकी नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है, वहां आप नहीं आ रहे हैं, कल जनशक्ति की बदौलत आपको उखाड़ लाएंगे वहां से। जब जनशक्ति सत्ता में परिवर्तन कर देगी तो आपको हटना पड़ेगा न, यही आशय था उनका।"
इस पूरे विवाद पर समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने एक अलग नजरिया पेश किया। उन्होंने कहा कि सदन के भीतर दो नेताओं की बातचीत को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने मामले को छात्रों के मुद्दों से जोड़ते हुए कहा कि अगर सरकार ने समय पर छात्रों की समस्याओं पर ध्यान दिया होता, तो देश में तनाव और अशांति का ऐसा माहौल नहीं बनता।
इनपुट: IANS



