महाराष्ट्र: बीड में सूखे की गंभीर स्थिति, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने राहत कार्यों में तेज़ी लाने के दिए निर्देश
महाराष्ट्र के बीड जिले में बारिश की कमी के कारण सूखे के हालात गंभीर हो गए हैं, जिससे किसानों की फसलें तबाह हो रही हैं और पीने के पानी के साथ-साथ पशुओं के चारे का भी संकट गहरा गया है। समाचार एजेंसी…
महाराष्ट्र के बीड जिले में बारिश की कमी के कारण सूखे के हालात गंभीर हो गए हैं, जिससे किसानों की फसलें तबाह हो रही हैं और पीने के पानी के साथ-साथ पशुओं के चारे का भी संकट गहरा गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस स्थिति से निपटने के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा के लिए शनिवार को जिले की पालक मंत्री और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने जिलाधिकारी कार्यालय में एक उच्च-स्तरीय बैठक की।
बैठक में उपमुख्यमंत्री ने प्रशासन को सूखे से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत पहुँचाने के लिए युद्धस्तर पर काम करने के निर्देश दिए। इस दौरान विधायक प्रकाश सोलुंके, विधायक धनंजय मुंडे, जिलाधिकारी विवेक जॉन्सन और पुलिस अधीक्षक नवनीत कावत समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
किसानों और फसलों पर फोकस
सूखे की मार झेल रहे किसानों को जल्द से जल्द मदद पहुँचाने के लिए सुनेत्रा पवार ने फसल नुकसान के पंचनामे की प्रक्रिया को तत्काल पूरा करने का आदेश दिया। उन्होंने कृषि एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि फसल बीमा की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सटीक हो, ताकि किसानों को उनका हक़ मिल सके।
पानी का विवेकपूर्ण उपयोग
जिले में पानी की किल्लत को देखते हुए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में 225 टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है, जिनकी निगरानी अब जीपीएस के माध्यम से होगी। पवार ने स्पष्ट किया कि पीने के पानी का इस्तेमाल किसी भी हाल में निर्माण कार्यों के लिए नहीं किया जाएगा। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि वे शादी और जन्मदिन जैसे समारोहों पर अनावश्यक खर्च से बचें और सामूहिक विवाह को प्राथमिकता दें। इसके अलावा, जल स्रोतों के पुनर्भरण और मरम्मत जैसे जल संरक्षण कार्यों को तत्काल शुरू करने के लिए भी कहा गया।
पशुओं के चारे और रोजगार की व्यवस्था
पशुओं के लिए चारे की समस्या से निपटने के लिए प्रशासन को अभी से योजना बनाने के निर्देश दिए गए। इसमें किसानों को साइलेज, हाइड्रोपोनिक्स और अजोला चारा उत्पादन का प्रशिक्षण देना शामिल है। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन रोकने के लिए VB-G रामजी योजना के तहत रोजगार गारंटी के कार्यों को जल संरक्षण से जोड़कर लागू करने पर जोर दिया गया, ताकि स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिल सके।
उपमुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को अपने मुख्यालय में रहकर किसानों से संवाद करने और उन्हें हर संभव मदद के साथ-साथ मानसिक संबल प्रदान करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस संकट की घड़ी में नागरिकों के साथ खड़ी है और उन्हें राहत पहुँचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
इनपुट: IANS



