गुजरात: समुद्र में जीवनरक्षक बनीं बोट एम्बुलेंस, 8 सालों में 777 आपात मामलों में पहुंचाई मदद
गुजरात के तटीय और द्वीपीय इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत करते हुए राज्य की बोट एम्बुलेंस सेवा एक महत्वपूर्ण जीवनरेखा बनकर उभरी है। अप्रैल 2018 से सितंबर 2026 तक की अवधि में इन…
गुजरात के तटीय और द्वीपीय इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत करते हुए राज्य की बोट एम्बुलेंस सेवा एक महत्वपूर्ण जीवनरेखा बनकर उभरी है। अप्रैल 2018 से सितंबर 2026 तक की अवधि में इन एम्बुलेंस ने 777 आपातकालीन मामलों में समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचाई है, जिनमें सबसे ज्यादा मामले गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं के थे। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह सेवा उन दूरदराज के क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद साबित हुई है, जहाँ सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल है।
इन आठ वर्षों में संभाले गए कुल 777 मामलों में से लगभग 46 प्रतिशत यानी 355 मामले गर्भावस्था संबंधी आपात स्थितियों से जुड़े थे। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें से अधिकांश मामले बेत द्वारका के निवासियों के थे, जहां पहले सड़क संपर्क का अभाव था, जिससे गर्भवती महिलाओं के लिए नाव से परिवहन ही एकमात्र सहारा था। यह आंकड़ा इन विशेष एम्बुलेंस की अहमियत को रेखांकित करता है।
दो केंद्रों से होता है संचालन
राज्य की 108 आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवा के तहत दो बोट एम्बुलेंस संचालित होती हैं। एक देवभूमि द्वारका जिले के ओखा में तैनात है और दूसरी पोरबंदर में। ओखा यूनिट ने इन वर्षों में सबसे अधिक 720 मामले (लगभग 92.7%) संभाले, जबकि पोरबंदर यूनिट ने 57 मामलों में अपनी सेवाएं दीं। यह सेवा द्वीपों, दूर-दराज के तटीय गांवों और समुद्र में काम करने वाले मछुआरों को ध्यान में रखकर शुरू की गई है।
अन्य आपातकालीन मामले
गर्भावस्था के अलावा, पेट में तेज दर्द दूसरा सबसे आम कारण था, जिसके लिए लोगों ने मदद मांगी। इस तरह के कुल 105 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद, मछली पकड़ने वाली नौकाओं, बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में लगी गैर-वाहन संबंधी चोटों के 83 मामले और हृदय संबंधी आपात स्थितियों के 82 मामले सामने आए। ये एम्बुलेंस मरीजों को अस्पताल पहुंचने से पहले ही जरूरी देखभाल मुहैया कराती हैं।
सरकार की प्रतिबद्धता
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पनशेरिया ने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा, “मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में हम राज्य के हर कोने तक, यहां तक कि समुद्र में भी, स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” उन्होंने बताया कि नाव एम्बुलेंस का बेड़ा पूरे क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्री-हॉस्पिटल देखभाल और जीवन रक्षक परिवहन सेवाएं प्रदान कर रहा है, ताकि आपातकालीन प्रतिक्रिया समय में सुधार हो सके।
इनपुट: IANS



