बुंदेलखंड में पर्यटन और पारिस्थितिकी को मिलेगा बढ़ावा, रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में छोड़े जाएंगे दो चीते
मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को एक नई दिशा मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव 7 अक्टूबर को सागर स्थित वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों को उनके…
मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को एक नई दिशा मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव 7 अक्टूबर को सागर स्थित वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों को उनके नए घर में प्रवेश कराएंगे। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम को लेकर टाइगर रिजर्व में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम से न केवल वन्यजीवों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
यह प्रोजेक्ट उस पहल की अगली कड़ी है जिसका भूमि पूजन स्वयं मुख्यमंत्री ने 25 मार्च को किया था। इसके बाद से ही रिजर्व में तेजी से काम शुरू हुआ और तय समय के भीतर चीतों के लिए विशेष बाड़ा (बोमा) तैयार कर लिया गया।
कैसा है चीतों का नया घर?
जिला वन अधिकारी (डीएफओ) रजनीश सिंह ने तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया, "हमने तेजी से काम शुरू किया और तय समय में बोमा (बाड़े) का निर्माण पूरा कर लिया।" उन्होंने बताया कि यह बाड़ा लगभग 440 हेक्टेयर में फैला है और यह पूरी तरह से शिकारियों से सुरक्षित है। इसकी विशेषताओं में पांच अलग-अलग हिस्से, एक क्वारंटाइन एरिया और इलेक्ट्रिक फेंसिंग शामिल है, ताकि कोई भी मांसाहारी जानवर न तो अंदर आ सके और न ही बाहर जा सके।
अधिकारी के अनुसार, बाड़े के अंदर पानी की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। 24 घंटे निगरानी के लिए पेट्रोलिंग कैंप बनाए गए हैं और कर्मचारी लगातार गश्त करते रहेंगे। इसके अलावा, एक वन्यजीव पशु चिकित्सक की नियुक्ति भी की गई है। डीएफओ सिंह ने यह भी बताया कि कूनो से प्रशिक्षण प्राप्त 60-70 कर्मचारी यहां तैनात किए गए हैं।
बुंदेलखंड के लिए एक बड़ा बदलाव
रजनीश सिंह ने इस प्रोजेक्ट को बुंदेलखंड के लिए बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा, "यह बुंदेलखंड का ऐसा प्रोजेक्ट है, जिससे बुंदेलखंड की परिस्थितिकी में परिवर्तन आएगा।" उन्होंने पानी की चुनौती का जिक्र करते हुए कहा कि यह टाइगर रिजर्व केन, बेतवा और नर्मदा के जलग्रहण क्षेत्र का हिस्सा होने के कारण पानी की उपलब्धता को बेहतर करेगा। सिंह ने विश्वास जताया, "चीता जब घास के मैदानों का संरक्षण करेगा तो स्वतः ही हमारे खेतों का संरक्षण होगा और हमारे बुंदेलखंड और भारत की प्रगति होगी।"
इसी दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि चीतों का आगमन केवल वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, इससे सागर और बुंदेलखंड में पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की उम्मीद है, क्योंकि देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटक इन्हें देखने के लिए आकर्षित हो सकते हैं।
इनपुट: IANS



