शनिवार, 20 जून 2026 · नई दिल्ली
बिहार

मढ़ौरा से गिनी तक भौकाल: एक साल में 51 'मेड इन बिहार' रेल इंजन निर्यात

बिहार के सारण स्थित मढ़ौरा डीजल रेल इंजन कारखाने से 51वां अत्याधुनिक रेल इंजन गिनी गणराज्य के लिए रवाना किया गया। एक साल में 51 इंजन निर्यात हुए, हर इंजन 4500 हॉर्सपावर का है। मुंद्रा पोर्ट के रास्ते भेजे जा रहे ये इंजन सिमांडू परियोजना में इस्तेमाल होंगे। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे भारत की तकनीकी क्षमता का प्रमाण बताया।

मढ़ौरा से गिनी तक भौकाल: एक साल में 51 'मेड इन बिहार' रेल इंजन निर्यात
AI जनित प्रतीकात्मक चित्र

बिहार के सारण जिले के मढ़ौरा स्थित डीजल रेल इंजन कारखाने ने एक नई उपलब्धि दर्ज की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 19 जून 2026 को इस कारखाने से 51वें अत्याधुनिक रेल इंजन को गिनी गणराज्य के लिए निर्यात हेतु हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस निर्यात को औपचारिक रूप से अनुमति दी और इसे भारत की तकनीकी ताकत का प्रमाण करार दिया।

विज्ञापन

खास बात यह है कि मढ़ौरा कारखाने से पहला इंजन ठीक एक साल पहले, 20 जून 2025 को निर्यात हुआ था। यानी महज बारह महीनों के भीतर इस कारखाने ने 51 इंजन विदेश भेजकर अपना भौकाल कायम कर दिया है। हर इंजन की क्षमता 4500 हॉर्सपावर है, जो इसे भारी-भरकम मालवहन के लिए मुफीद बनाती है।

कैसे पहुंचेगा इंजन गिनी तक

एक रिपोर्ट के अनुसार, निर्यात किए जाने वाले ये इंजन मढ़ौरा से सड़क और रेल मार्ग होते हुए गुजरात के मुंद्रा पोर्ट तक पहुंचाए जाते हैं और वहां से समुद्री मार्ग के जरिए गिनी गणराज्य भेजे जाते हैं। इन इंजनों का इस्तेमाल गिनी की सिमांडू परियोजना में होना है, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी लौह अयस्क परियोजनाओं में से एक बताया गया है।

मढ़ौरा कारखाना भारत सरकार और अमेरिकी कंपनी वेबटेक के संयुक्त उपक्रम के तहत संचालित होता है। निर्यात से पहले इस कारखाने ने भारतीय रेल को भी 825 आधुनिक लोकोमोटिव सौंपे हैं।

बिहार को आर्थिक फायदा

रिपोर्ट के मुताबिक, इस कारखाने की गतिविधियों से बिहार को जीएसटी राजस्व के रूप में 1000 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई हुई है। यह आंकड़ा राज्य के औद्योगिक मानचित्र पर मढ़ौरा की बढ़ती अहमियत को दर्शाता है।

इस मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, सारण सांसद राजीव प्रताप रूढ़ी और सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। इंजन को रवाना करने में लोको पायलट निर्भय कुमार और सहायक लोको पायलट विकास कुमार शर्मा की भूमिका रही, जबकि वेबटेक की ओर से लोको पायलट सुनैना कुमारी और मैनेजर शिव प्रताप सिंह भी शामिल हुए।

बिहार में रेल परियोजनाओं का खाका

रेल मंत्री ने इस अवसर पर बिहार में चल रही रेल परियोजनाओं का ब्योरा भी रखा। मिली जानकारी के मुताबिक, राज्य में फिलहाल 1.15 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली रेल परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। बीते वर्षों में हुए विकास के कुछ अहम आंकड़े इस प्रकार रहे:

  • पिछले 12 वर्षों में 2034 किलोमीटर नई रेल लाइनें बिछाई गईं।
  • राज्य में 98 रेल स्टेशनों का विकास किया जा रहा है।
  • वार्षिक रेल बजट 2014 से पहले के ₹1000 करोड़ से बढ़कर अब ₹10,369 करोड़ हो गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ लंबित परियोजनाओं को केंद्र सरकार ने गति दी है, जिनमें विक्रमशिला-कटारिया गंगा पुल और नरकटियागंज-रक्सौल-सीतामढ़ी-दरभंगा रेल लाइन शामिल हैं। इसी कार्यक्रम के दौरान छपरा जंक्शन से छपरा-नई दिल्ली एक्सप्रेस ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाई गई।

रेल मंत्री का दावा

कार्यक्रम में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि "मढ़ौरा प्लांट की सफलता भारत की तकनीकी क्षमता का प्रमाण है।" उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत के बाद अब यह कारखाना दुनिया में अपना दम दिखा रहा है। उनके मुताबिक, यहां निर्मित इंजन आधुनिक तकनीक और उच्च गुणवत्ता के कारण वैश्विक स्तर पर पसंद किए जा रहे हैं।

आगे क्या

मढ़ौरा कारखाने की निर्यात रफ्तार बिहार के लिए न केवल औद्योगिक पहचान, बल्कि राजस्व और रोजगार के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है। सिमांडू जैसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय परियोजना में इन इंजनों का इस्तेमाल भारतीय रेल विनिर्माण की वैश्विक पहुंच का संकेत है। राज्य में लंबित बड़ी परियोजनाओं के पूरा होने पर बिहार के रेल नेटवर्क का दायरा और बढ़ने की उम्मीद है।

विषयबिहार
Bihar News Live Hindi

Bihar News Live Hindi

News4Social का बिहार डेस्क प्रदेश की राजनीति, प्रशासन, अपराध और ज़िलावार स्थानीय ख़बरों पर अपडेट देता है। डेस्क कई स्रोतों से तथ्य जुटाकर और सत्यापित कर संतुलित रिपोर्टिंग करता है। प्रत्येक ख़बर प्रकाशन से पहले संपादकीय समीक्षा से गुज़रती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →