कांगो में इबोला का कहर: हर 20 दिन में दोगुने हो रहे मामले, संयुक्त राष्ट्र ने मांगी तत्काल मदद
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला का प्रकोप अब तक के सबसे तेज संकट के रूप में उभर रहा है, जहाँ मामले हर 20 दिन में दोगुने हो रहे हैं। इस भयावह स्थिति को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र के दो…
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला का प्रकोप अब तक के सबसे तेज संकट के रूप में उभर रहा है, जहाँ मामले हर 20 दिन में दोगुने हो रहे हैं। इस भयावह स्थिति को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल मदद बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि महामारी के फैलने की रफ्तार बचाव के प्रयासों से कहीं ज्यादा तेज है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ इबोला समन्वयक जूलियन हार्नीस और विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काऊ ने बुधवार को इतुरी प्रांत की राजधानी बूनिया से एक वर्चुअल प्रेस ब्रीफिंग में यह चिंता जाहिर की। बूनिया इस प्रकोप का केंद्र बना हुआ है।
चिंताजनक आंकड़े और तुलना
अधिकारियों ने स्थिति की गंभीरता को आंकड़ों के साथ सामने रखा। जूलियन हार्नीस ने बताया, "पिछले 24 घंटों में कांगो में इबोला से 50 लोगों की मौत हुई है।" उन्होंने कहा कि मामलों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है, जो हर 20 दिन में दोगुनी हो रही है, और यह बचाव प्रयासों की गति से कहीं अधिक है।
वहीं, कार्ल स्काऊ ने इस संकट की तुलना पश्चिम अफ्रीका के प्रकोप से करते हुए कहा, "डीआरसी में पिछले दो महीनों में 1,000 लोगों की मौत हुई है, जबकि पश्चिम अफ्रीका में 1,000 मौतें होने में 8 महीने लगे थे।"
संघर्ष और खाद्य असुरक्षा
इबोला के इस प्रकोप ने पूर्वी डीआरसी में पहले से ही जारी संघर्ष और खाद्य संकट को और गहरा कर दिया है। स्काऊ के मुताबिक, इस क्षेत्र में लगभग एक करोड़ (10 मिलियन) लोग खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। प्रकोप का केंद्र इतुरी प्रांत सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों में से है, जहाँ करीब 20 लाख (2 मिलियन) लोगों को खाद्य सहायता की तत्काल आवश्यकता है।
फंडिंग की तत्काल जरूरत
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने बचाव कार्यों को बड़े पैमाने पर बढ़ाने के लिए तत्काल फंडिंग की मांग की है। हार्नीस ने कहा कि डीआरसी के लिए संयुक्त राष्ट्र की 2.1 अरब डॉलर की मानवीय सहायता योजना को अब तक केवल 45 प्रतिशत फंडिंग ही मिली है। वहीं, स्काऊ ने बताया कि अकेले WFP को अगले 6 महीनों में इबोला से निपटने के लिए 7.6 करोड़ डॉलर की जरूरत है, जिसमें सिर्फ लॉजिस्टिक्स का खर्च शामिल है। इसके अलावा, हार्नीस ने सदस्य देशों से अपनी सीमाएं खुली रखने का भी आग्रह किया ताकि चिकित्सा दल और राहत सामग्री आसानी से पहुंच सके।
इनपुट: IANS



