लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पास: कोटा के छात्रों ने कहा- 'न्याय की उम्मीद जगी, पर लागू होना ज़रूरी'
प्रतियोगी परीक्षाओं के कोचिंग हब कोटा में छात्रों ने लोकसभा से 'एंटी-पेपर लीक अमेंडमेंट बिल' पारित होने पर संतोष व्यक्त किया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों ने इसे एक…
प्रतियोगी परीक्षाओं के कोचिंग हब कोटा में छात्रों ने लोकसभा से 'एंटी-पेपर लीक अमेंडमेंट बिल' पारित होने पर संतोष व्यक्त किया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों ने इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया है, लेकिन साथ ही इसके प्रभावी और दीर्घकालिक कार्यान्वयन पर भी जोर दिया है। उनका मानना है कि सरकार को सिर्फ कानून बनाने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार करने होंगे।
छात्रों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
कोटा में तैयारी कर रहे कई छात्रों ने इस विधेयक का स्वागत तो किया, लेकिन इसकी सज़ा और जुर्माने के प्रावधानों को और सख्त करने की मांग भी की। छात्र आयुष के अनुसार, पेपर लीक की घटनाएं पूरी तरह बंद होनी चाहिए, क्योंकि इससे वर्षों की मेहनत बर्बाद हो जाती है। उन्होंने एनटीए में सुधार की भी वकालत की। वहीं, छात्रा दिव्या ने कहा कि 10 करोड़ का जुर्माना पर्याप्त नहीं है और लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद करने वालों के लिए आजीवन कारावास जैसा कठोर प्रावधान होना चाहिए।
एक अन्य छात्र गौरव ने कहा, "यदि भविष्य में फिर किसी परीक्षा का पेपर लीक हुआ तो विरोध पहले से अधिक उग्र हो सकता है।" उनका मानना था कि जुर्माने की राशि और अधिक होनी चाहिए ताकि कोई ऐसा अपराध करने की हिम्मत न कर सके।
कार्यान्वयन और भविष्य की चिंता
कई छात्रों ने कानून के सफल कार्यान्वयन को इसकी असली परीक्षा बताया। आदित्य कुमार ने कहा, "किसी भी कानून की असली परीक्षा उसके लॉन्ग टर्म इम्प्लीमेंटेशन में होती है।" उन्होंने कहा कि यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले वर्षों में इसका प्रभाव कैसा रहता है।
वहीं, आदिश श्रीवास्तव ने इस बिल को छात्रों की एकजुटता का परिणाम बताते हुए खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि युवाओं के आंदोलन ने सरकार तक अपनी बात पहुंचाई। हालांकि, उन्होंने भी यह माना कि सात साल की सजा पूरी तरह पर्याप्त नहीं है, लेकिन सुधार का अवसर मिलना चाहिए। छात्रों ने इस बात पर भी जोर दिया कि पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के प्रति भी सरकार को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और प्रभावितों को मुआवजा देने पर विचार करना चाहिए।
इनपुट: IANS



