संसद सत्र से पहले उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका, लोकसभा अध्यक्ष ने 6 बागी सांसदों के शिंदे गुट में विलय को दी मंजूरी
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्धव गुट के छह बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे के…
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्धव गुट के छह बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा सचिवालय ने सभी छह सांसदों के विलय को मान्य कर दिया है, जिससे लोकसभा में शिंदे गुट की ताकत बढ़ गई है।
इस विलय के बाद, शिंदे गुट के सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो गई है, जबकि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों की संख्या 9 से घटकर केवल 3 रह गई है। उद्धव खेमे में अब सिर्फ अरविंद सावंत (मुंबई दक्षिण), अनिल देसाई (मुंबई दक्षिण मध्य) और राजभाऊ वाजे (नासिक) ही बचे हैं।
कौन हैं छह बागी सांसद?
शिंदे गुट में शामिल होने वाले यूबीटी के छह सांसदों में ओमप्रकाश भूपालसिंह उर्फ ओमराजे निंबालकर (धाराशिव/उस्मानाबाद), नागेश बापुराव पाटिल आष्टीकर (हिंगोली) और संजय हरिभाऊ जाधव (परभणी) शामिल हैं। इनके अलावा संजय उत्तमराव देशमुख (यवतमाल-वाशिम), भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे (शिरडी) और संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व) ने भी पाला बदला है। यह राजनीतिक घटनाक्रम पिछले महीने हुआ था, जिसे एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया था।
शिवसेना (यूबीटी) की तीखी प्रतिक्रिया
लोकसभा अध्यक्ष के इस फैसले पर शिवसेना (यूबीटी) ने कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी के प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा, "2022 में जब हमारी पार्टी को तोड़ा जा रहा था, तब से हम लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन, तब से आज तक हमें यह पता नहीं चल पाया कि हमारी गलती क्या है?" उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह पहले ही "चुरा" लिया गया था और अब उनके छह सांसद भी "चुरा" लिए गए हैं।
दुबे ने आगे कहा, "इस बार हमारे जो सांसद चुराए गए, उन्हें एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना का सांसद बताया जा रहा है, जबकि वो हमारे नाम और हमारे चुनाव चिन्ह पर चुनकर आए। ऐसे में लोकसभा स्पीकर ने दोनों पक्षों को सुने बिना अपना फैसला दे दिया। यह दिखाता है कि लोकतंत्र कमजोर होता जा रहा है।"
मानसून सत्र और बदले समीकरण
यह फैसला 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले आया है, जो 13 अगस्त तक चलेगा। बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के बीच एनडीए सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की कोशिश करेगी, जिसमें महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक भी शामिल हैं। वहीं, इसी सत्र में तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों को भी अलग बैठने की अनुमति मिल गई है, जो एनसीपीआई में शामिल हो गए हैं।
इनपुट: IANS



