बदलते दफ्तरों में महिलाओं की सुरक्षा: गिग वर्कर्स और डिजिटल उत्पीड़न को POSH कानून के दायरे में लाने पर मंथन
कामकाज की बदलती दुनिया में महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परामर्श का आयोजन किया। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 17 और…
कामकाज की बदलती दुनिया में महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परामर्श का आयोजन किया। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 17 और 18 जुलाई को हुए इस दो दिवसीय कार्यक्रम का मुख्य फोकस गिग वर्कर्स, वर्क-फ्रॉम-होम और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाले यौन उत्पीड़न जैसी नई चुनौतियों से निपटने के लिए मौजूदा 'पॉश एक्ट' को और प्रभावी बनाना था।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस राष्ट्रीय मंथन में नीति निर्माताओं से लेकर न्यायपालिका, कानूनी विशेषज्ञों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और नागरिक समाज तक के हितधारकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 को मौजूदा दौर की जरूरतों के मुताबिक ढालने पर विचार-विमर्श करना था।
कानून में समय के साथ बदलाव पर जोर
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने इस बात पर जोर दिया कि पॉश अधिनियम सिर्फ एक कानूनी व्यवस्था नहीं, बल्कि कामकाजी महिलाओं को उनकी गरिमा और अधिकारों की रक्षा का भरोसा दिलाने वाला कानून है। उन्होंने कहा, "आज कार्यस्थलों की प्रकृति तेजी से बदल रही है। हाइब्रिड वर्क मॉडल, वर्क फ्रॉम होम, डिजिटल संचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग को देखते हुए संस्थागत व्यवस्था, कार्यालयी नीतियों और कानूनी ढांचे को भी समय के साथ विकसित करना होगा।"
परामर्श के मुख्य बिंदु
विचार-विमर्श के दौरान कई अहम मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स, घर से काम करने वाले कर्मचारियों और संविदा कर्मियों को भी पॉश कानून के तहत प्रभावी सुरक्षा मिलनी चाहिए। इसके अलावा, ईमेल, मैसेजिंग ऐप, वर्चुअल मीटिंग, सोशल मीडिया और एआई-जनित आपत्तिजनक सामग्री के जरिये होने वाले डिजिटल यौन उत्पीड़न से निपटने के लिए कानूनी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी सहमति बनी। बैठक में आंतरिक शिकायत समितियों (आईसी) को और स्वतंत्र व प्रभावी बनाने के उपायों पर भी सुझाव दिए गए।
सरकार को भेजी जाएंगी सिफारिशें
इस कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी भी मौजूद थीं। इस अवसर पर आयोग ने आंतरिक और स्थानीय समितियों के लिए जांच प्रक्रिया पर एक हैंडबुक भी जारी की, ताकि शिकायतों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच सुनिश्चित हो सके। राष्ट्रीय महिला आयोग ने बताया कि इस परामर्श और विभिन्न हितधारकों से मिले सुझावों के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा। इसका लक्ष्य देशभर में महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करना है।
इनपुट: IANS



