जानिए क्यों मानते है सिख गुरू नानक देव को अपना प्रथम गुरू

0
gurunank dev
जानिए क्यों मानते है सिख गुरू नानक देव को अपना प्रथम गुरू

सिख धर्म के संस्थापक गुरू नानक देव जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुआ था. कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुरू नानक देव जी की जयंती पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. कार्तिक पूर्णिमा को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है और इस वर्ष गुरू नानक देव जी की जयंती 12 नवंबर दिन मंगलवार को है.

विद्वान गुरु नानक की जन्मतिथि 15 अप्रैल, 1469 में हुआ था. नानक जी का जन्म रावी नदी के किनार स्थित तलवंडी नामक गांव खत्रीकुल में हुआ था. गुरु नानक ने सिख धर्म की स्थापना की थी. गुरु नानक सिखों के आदिगुरु हैं. गुरु नानक देव जी अपने व्यक्तित्व में दार्शनिक, योगी, गृहस्थ, धर्मसुधारक, समाजसुधारक, कवि, देशभक्त और विश्वबंधु – सभी के गुण समेटे हुए थे.

बचपन के समय में कई चमत्कारिक घटनाएं घटी जिन्हें देखकर गांव के लोग इन्हें दिव्य व्यक्ति मानते थे. नानक देव ने समाज में फैली कुरीतियों को खत्म करने के लिए कई यात्राए भी की थी.
गुरू नानक जी के दो पुत्र भी थे. जिनका नाम श्रीचंद और लख्मी चंद था. गुरु नानक देव जी मूर्ति पूजा को निरर्थक मानते थे. जिन्होंने रुढ़िवादी संस्कारों के खिलाफ आवाज उठाई थी. गुरु नानक देव जी के अनुसार ईश्वर सभी लोगों के अंदर होता है. बस उसे पहचानने की जरुरत होती है. गुरु नानक देव जी अपने पुत्रों के जन्म के बाद मरदाना, लहना, बाला और रामदास के साथ तीर्थयात्रा पर गए थे. इन सभी ने सन् 1521 में अपने तीन यात्रा चक्रों को पूरा कर लिया था. जिसमें वह भारत सहित अफगानिस्तान, फारस और अरब के मुख्य स्थानों पर गए थे. पंजाबी में इन यात्राओं को उदासियाँ भी कहा जाता है.

गुरु नानक जंयती पर सिख धर्म के लोग गुरु नानक देव जी को याद करते हैं. इस दिन सिख धर्म के लोग अनेकों सभाएं करते हैं. इनमें गुरु नानक देव जी के द्वारा लोगों को दी गई शिक्षाओं के बारें में बताया जाता है. इसके अलावा यह भी बताया जाता है कि कैसे उन्होंने समाज की कुरीतियों को दूर करने में अपना योगदना दिया था.

यह भी पढ़ें : हनुमान जी पूजा में कपड़ों के रंगों का होता है बहुत महत्व, जानें

गुरु नानक देव जी मूर्ति पूजन के विरुद्ध थे. वे मानते थे कि ईश्वर स्वंय के अंदर ही है बस उसे पहचानने की आवश्यकता है. सिख धर्म के लोग इस दिन अखंड पाठ भी कराते हैं जो लगातार 48 घंटो तक चलता है. इसमें सिक्ख धर्म के प्रमुख ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ किया जाता है. इतना ही नहीं सिक्ख धर्म के लोग गुरु नानक जंयती से एक दिन पहले भजन कीर्तन करते हुए प्रभात फेरी भी लगाते है.