जाने क्यों मनाते हैं वैलेंटाइन डे का खास दिन !

VALENTINE
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प्यार एक ऐसा शब्द जिसको सूनने का एहसास ही अलग होता है हम उसे सिर्फ मेहसूस कर सकते है। वैसे तो प्यार किसी दिन का मोहताज़ नहीं होता है। लेकिन वैलेंटाइन डे को हम प्यार के प्रतीक के रूप में जान सकते है। अब बात करते हैं इसके इतिहास के बारे मे की आखिर इसे प्यार का दिन क्यों कहते हैं ?

हर साल दुनिया भर में 14 फरवरी का दिन वैलेंटाइन डे के तोर पर मनाया जाता है। काफी पुरानी बात है , जब रोम में राजा क्‍लॉडियस का सम्राज्य हुआ करता था, जो अपने पराक्रम, वीरता और श्रेष्ठता के लिए दुनिया भर में जाना जाता था और एक दिन क्‍लॉडियस ने अपने सम्राज्य को विश्व शक्ति बनाने के लिए अजीबोग़रीब फ़रमान जारी किया।

जिसमें उन्होंने अपने सम्राज्य के किसी भी पुरुष को शादी नहीं करने का आदेश दिया। इस बारे में क्‍लॉडियस का मानना था कि शादी करने से पुरुष की बौद्धिक और शारीरिक शक्ति का खत्म हो जाती है। ऐसे में रोम की वीरता और श्रेष्ठता बनाए रखने के लिए पुरुषों को अविवाहित रहना ज़रूरी था।

क्‍लॉडियस के इस तुग़लकी फ़रमान ने पूरे रोम में हाहाकार मचा दिया । लोगों ने इसका विरोध किया और वे धार्मिक संतों के पास पहुंचे। इसके बाद संत वैलेंटाइन ने क्‍लॉडियस के इस तुग़लकी फ़रमान का पुरज़ोर विरोध किया और रोम के लोगों को शादी करने के लिए प्रेरित किया।

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इसके अतिरिक्त संत वैलेंटाइन ने क्‍लॉडियस के आदेश की परवाह न करते हुए, रोम में सैनिकों और अधिकारियों समेत आम लोगों की शादी करवाई। जिससे क्लॉडियस काफी नाराज़ हुए और उन्होंने 14 फरवरी सन् 269 को संत वैलेंटाइन को गिरफ्तार करने का आदेश दिया और फिर संत वैलेंटाइन को गिरफ्तार कर उन्हें सूली पर चढ़ा दिया गया। जिस दिन संत वैलेंटाइन को सूली पर लटकाया गया, उसी दिन से वैलेंटाइन डे मनाने की प्रथा की शुरुआत हुई। भारत में भी इस दिन को युवा वर्ग प्यार के इज़हार के दिन के रूप में मानते है, हम उम्मीद करते है की इस दिन आपकी ज़िंदगी में भी प्यार की बहार आजाए।