गुरूवार, 9 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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जानिए, किसने दिया नीतीश को सुझाव

जी हाँ एक ऐसा शख्स है, जिसने बिहार के सीएम नीतीश को सुझाव दिया है। क्या आप जानते है कि आखिर कौन है वो शख्स जिसने सीएम नीतीश को सुझाव दिया?

जानिए, किसने दिया नीतीश को सुझाव
जी हाँ एक ऐसा शख्स है, जिसने बिहार के सीएम नीतीश को सुझाव दिया है। क्या आप जानते है कि आखिर कौन है वो शख्स जिसने सीएम नीतीश को सुझाव दिया? और सीएम नीतीश को क्या सुझाव दिया है? जानने के लिए खबर को ध्यानपूर्वक पढ़े! सीएम नीतीश कुमार को सुझाव देने वाला और कोई नहीं, बल्कि बीजेपी का ही पार्षद है। लेकिन बीजेपी का आखिर कौन है, ये पार्षद जिसने सीएम को सुझाव दिया और क्या सुझाव दिया, यह भी आपको बताते है। बीजेपी के पार्षद नवल किशोर यादव ने बिहार के सीएम नीतीश को एक बड़ा सुझाव दिया है। वैसे ये सुझाव इतना भी बड़ा नहीं है, क्योंकि इस मुद्दे पर अभी तक सिर्फ बातें ही होती आई है। उफ्फ! अब आप भी सोच में पड़ गये होंगे कि आखिर ऐसी कौन सी सलाह दे डाली बीजेपी के पार्षद ने? तो चलिए आपके इस सस्पेंस को खत्म करते हुए बताते है कि आखिर क्या है वो सुझाव। आपको बता दें कि बीजेपी विधान पार्षद नवल किशोर ने सीएम नीतीश कुमार से आग्रह करते हुए, यह सुझाव दिया है कि शिक्षा की गुणवत्ता के लिए समाज को साथ लेकर चले। इसके लिए बीजेपी पार्षद ने कहा कि सीएम कोई ऐसा कानून बनाये, जिससे सरकारी स्कूलों में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, पदाधिकारियों के साथ-साथ वैसे सरकारी कर्मचारियों के बच्चे पढ़ें जो सरकारी खजाने से वेतन लेते हैं। साथ ही बीजेपी विधान पार्षद नवल किशोर यादव ने सरकार की ओर से शिक्षा में सुधार लाने के लिए उठाये गये कदम की सराहना करते हुए कुछ सुझाव दिये हैं। पार्षद नवल किशोर यादव का कहना है कि सरकार सिर्फ 50 साल के ऊपर के अयोग्य शिक्षक को ही क्यों हटाना चाहती है, अगर 25 साल का भी शिक्षक अयोग्य है, तो उसे भी हटाया जाए। बीजेपी पार्षध नवल किशोर यादव ने जो सुझाव दिए हैं, उनमें सरकारी नौकर, जनप्रतिनिधियों के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ें, 50 साल के अयोग्य शिक्षक ही क्यों, 25 साल के अयोग्य को भी बाहर का नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाया जाए, सिर्फ अयोग्य शिक्षक ही नहीं, अयोग्य अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को भी हटाया जाए, सुझाव शामिल है। बीजेपी पार्षद ने न सिर्फ सुझाव दिये बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर बातें कही है। बीजेपी पार्षद ने कहा कि कारण पता लगाया जाए कि सटीक औऱ सुचारू व्यवस्था के बावजूद भी सात महीने में वेतन क्यों मिलते हैं? साथ ही बीजेपी पार्षद ने यह भी कहा कि पढ़ाई के सिवाय शिक्षकों से अन्य काम लेना बंद हो, मुख्यमंत्री बिहार के विकास के लिए कृतसंकल्पित हैं, वो गांव के लोगों को भी जोड़ें। बहरहाल, बीजेपी के पार्षद का यह सुझाव सुनने में तो काफी अच्छा लग रहा है, लेकिन बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि क्या पुलिस-प्रशासन के अधिकारी, सरकारी कर्मचारी और जनप्रतिनिधि अपने बच्चों की पढ़ाई सरकारी स्कूल में करायेंगे? यह तो खैर वक्त ही बताएगा। लेकिन, अगर शराबबंदी की तरह ही कठोर कानून बन गया तो निश्चित तौर पर शिक्षा व्यवस्था बेहतर हो सकती है।
S

Shreya

श्रेया News4Social की संवाददाता हैं। वे उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की खबरों को कवर करती हैं, और स्थानीय मुद्दों को तथ्यपरक ढंग से सामने लाने पर ज़ोर देती हैं। सभी लेख देखें →

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