1994 के हीरो मेजर जनरल एस.के. रजदान का निधन, व्हीलचेयर से बने थे सेना के पहले जनरल
भारतीय सेना के एक असाधारण अधिकारी और कीर्ति चक्र से सम्मानित मेजर जनरल सुनील कुमार रजदान (सेवानिवृत्त) का गुरुवार को निधन हो गया। वह अपनी शारीरिक अक्षमताओं पर विजय पाते हुए व्हीलचेयर से जनरल रैंक तक…
भारतीय सेना के एक असाधारण अधिकारी और कीर्ति चक्र से सम्मानित मेजर जनरल सुनील कुमार रजदान (सेवानिवृत्त) का गुरुवार को निधन हो गया। वह अपनी शारीरिक अक्षमताओं पर विजय पाते हुए व्हीलचेयर से जनरल रैंक तक पहुंचने वाले भारतीय सेना के पहले अधिकारी थे। उनके निधन पर रक्षा बलों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मेजर जनरल रजदान को उनकी अदम्य वीरता और राष्ट्र के प्रति असाधारण सेवा के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उनका जीवन दृढ़ इच्छाशक्ति और कर्तव्यनिष्ठा का एक प्रेरणादायक अध्याय है, जिसने उन्हें शारीरिक चुनौतियों के बावजूद देश सेवा जारी रखने के लिए प्रेरित किया।
1994 का वह साहसी अभियान
1994 में जम्मू-कश्मीर में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर रहते हुए सुनील कुमार रजदान ने एक बेहद जोखिम भरे आतंकवाद-रोधी अभियान का नेतृत्व किया था। लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों द्वारा कुछ युवतियों को बंधक बनाए जाने की सूचना पर उन्होंने अपनी टीम के साथ मोर्चा संभाला। इस दौरान उन्होंने आगे बढ़कर दो आतंकवादियों को मार गिराया।
इसी अभियान में उनके पेट में कई गोलियां लगीं, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, उन्होंने तत्काल चिकित्सा सहायता लेने से इनकार कर दिया और तब तक मोर्चे पर डटे रहे, जब तक कि सभी बंधकों को सुरक्षित नहीं निकाल लिया गया और खतरा समाप्त नहीं हो गया।
सम्मान और अदम्य इच्छाशक्ति
उनकी इस असाधारण बहादुरी के लिए उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार 'कीर्ति चक्र' से सम्मानित किया गया। इस चोट के कारण उनके शरीर का कमर से नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। अपनी दिव्यांगता को चुनौती देते हुए, उन्होंने सेवा में बने रहकर एक नई मिसाल कायम की और व्हीलचेयर पर रहते हुए मेजर जनरल के पद तक पहुंचे।
मेजर जनरल रजदान 7वीं बटालियन, पैराशूट रेजिमेंट (7 पैरा एसएफ) के एक प्रतिष्ठित अधिकारी थे। सेवानिवृत्ति से पहले उन्होंने मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में महत्वपूर्ण शोध कार्य किए। उनका जीवन और समर्पण सशस्त्र बलों की आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
इनपुट: IANS



