रविवार, 16 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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NEET पर तमिलनाडु विधानसभा के नए प्रस्ताव के बाद भी चेन्नई में प्रदर्शन, अनशन जारी

तमिलनाडु में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर गतिरोध बना हुआ है। विधानसभा द्वारा इस परीक्षा से छूट के लिए एक नया प्रस्ताव पारित किए जाने के बावजूद, चेन्नई में विरोध प्रदर्शनों का दौर थमता नहीं दिख…

NEET पर तमिलनाडु विधानसभा के नए प्रस्ताव के बाद भी चेन्नई में प्रदर्शन, अनशन जारी
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर गतिरोध बना हुआ है। विधानसभा द्वारा इस परीक्षा से छूट के लिए एक नया प्रस्ताव पारित किए जाने के बावजूद, चेन्नई में विरोध प्रदर्शनों का दौर थमता नहीं दिख रहा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, प्रदर्शनकारियों का मानना है कि जब तक NEET को पूरी तरह से समाप्त नहीं किया जाता, तब तक वंचित और कमजोर वर्गों के छात्रों के हितों की रक्षा संभव नहीं है।

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चेन्नई के तिरुवोट्टियूर और एग्मोर इलाकों में दो अलग-अलग आंदोलन चल रहे हैं। इनमें से एक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल है, जो भारतीय राजस्व सेवा के पूर्व अधिकारी बालामुरुगन 27 जुलाई से कर रहे हैं। रविवार को उनकी भूख हड़ताल 20वें दिन में प्रवेश कर गई। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे।

भूख हड़ताल और प्रमुख मांगें

बालामुरुगन मुख्य रूप से तमिलनाडु को NEET से छूट देने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा उनकी दो अन्य मांगें भी हैं, जिनमें कथित कॉकरोच संबंधी टिप्पणी को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत का इस्तीफा और दिल्ली में छात्रों पर कथित हमले को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा शामिल है। लंबे अनशन के कारण उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जिसके चलते दिवंगत मेडिकल अभ्यर्थी एस. अनीता के भाई मणिरत्नम ने राज्य सरकार से उनके स्वास्थ्य की जांच और आंदोलन के लिए एक निश्चित स्थान मुहैया कराने की अपील की है। फिलहाल, बालामुरुगन अपने घर से ही यह विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

एग्मोर में कला के माध्यम से विरोध

वहीं, एग्मोर के थायगम कॉम्प्लेक्स में 'ओजी तमिजा' समूह द्वारा एक अलग तरह का धरना पिछले 24 दिनों से जारी है। यह धरना प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक चलता है। संगठन "आइए प्रतिरोध का उत्सव मनाएं" नारे के साथ संगीत, नाटक और नृत्य जैसे कलात्मक माध्यमों से NEET के खिलाफ जनसमर्थन जुटा रहा है। इस प्रदर्शन में छात्र, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं। शिक्षाविद प्रिंस गजेंद्र बाबू और मणिरत्नम ने भी इस प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया है।

सरकार का पक्ष और पिछला अनुभव

प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से विधानसभा के प्रस्ताव को जल्द मंजूरी देने की अपील की है। विधानसभा में नवीनतम प्रस्ताव पेश करते हुए स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री केजी अरुणराज ने कहा था कि NEET उन छात्रों को फायदा पहुंचाती है जो महंगी कोचिंग का खर्च उठा सकते हैं और इससे स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम से ध्यान हटता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस परीक्षा ने ग्रामीण, गरीब और सामाजिक रूप से वंचित छात्रों के लिए मेडिकल शिक्षा के अवसरों को कम कर दिया है। गौरतलब है कि इससे पहले 2024 में तत्कालीन डीएमके सरकार द्वारा पारित ऐसे ही एक विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिल सकी थी।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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