उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण को नई गति, 6 नई परियोजनाओं को हरी झंडी, किसानों और युवाओं को होगा लाभ
उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को और बढ़ावा देने के लिए सरकार ने छह नई परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इन परियोजनाओं में राइस मिल, फ्रूट पल्प, रेडी-टू-ईट…
उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को और बढ़ावा देने के लिए सरकार ने छह नई परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इन परियोजनाओं में राइस मिल, फ्रूट पल्प, रेडी-टू-ईट, रेडी-टू-कुक, बेकरी और आइसक्रीम उत्पादन इकाइयां शामिल हैं। इस कदम का उद्देश्य प्रदेश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस फैसले पर कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग किसानों की आय बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा, "सरकार की प्राथमिकता किसानों के कृषि और बागवानी उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है।" मौर्य के मुताबिक, इन परियोजनाओं से न केवल किसानों को बेहतर बाजार और मूल्य मिलेगा, बल्कि युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार व उद्यमिता के नए अवसर भी खुलेंगे।
रोजगार और महिला सशक्तिकरण पर जोर
केशव प्रसाद मौर्य ने इस बात पर भी जोर दिया कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमियों को प्रसंस्करण के साथ-साथ पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन से जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाई जा सकती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा होगा और महिलाएं आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत होंगी।
निवेश को बढ़ावा देने की तैयारी
उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के तहत मिलने वाले लाभों का व्यापक प्रचार करने का निर्देश दिया है। इसका लक्ष्य अधिक से अधिक उद्यमियों को इस क्षेत्र में निवेश के लिए आकर्षित करना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' के विजन के तहत यूपी खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में निवेश और रोजगार का एक नया केंद्र बन रहा है। मौर्य ने प्रदेश में फल-सब्जी, दूध, अनाज, दालें, मसाले, शहद और जूस-पल्प जैसे क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाओं का भी जिक्र किया।
समिति की बैठक और निर्देश
यह फैसला उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अपर मुख्य सचिव बी.एल. मीणा की अध्यक्षता में हुई अप्रेजल समिति की बैठक में लिया गया। समिति ने सभी छह परियोजनाओं को जरूरी शर्तों के साथ स्वीकृति प्रदान की। समिति ने परियोजना संचालकों को निर्देश दिया है कि वे कच्चे माल की खरीद में स्थानीय किसानों और दुग्ध उत्पादकों को प्राथमिकता दें। साथ ही, परियोजनाओं को समय पर पूरा करने, उनका नियमित निरीक्षण करने और प्रगति की लगातार समीक्षा करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
इनपुट: IANS



