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PMFME योजना: 2 लाख छोटे कारोबारियों को मिला लोन, 11 लाख रोजगार पैदा हुए

देश में छोटे खाद्य प्रसंस्करण कारोबारियों को बढ़ावा देने वाली प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (PMFME) योजना ने एक अहम पड़ाव पार कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस योजना के तहत अब

PMFME योजना: 2 लाख छोटे कारोबारियों को मिला लोन, 11 लाख रोजगार पैदा हुए
(फोटो: IANS)

देश में छोटे खाद्य प्रसंस्करण कारोबारियों को बढ़ावा देने वाली प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (PMFME) योजना ने एक अहम पड़ाव पार कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक दो लाख से ज़्यादा उद्यमों को ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे देश भर में लगभग 11 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।

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इस उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने योजना की सफलता की सराहना की। उन्होंने बताया कि इन ऋणों की मदद से 20,300 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ है। यह योजना छोटे उद्यमियों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में लाने में भी बड़ी भूमिका निभा रही है।

कौन हैं इस योजना के लाभार्थी?

इस योजना की एक बड़ी खासियत यह है कि इसके लाभार्थियों में बड़ी संख्या में पहली बार उद्यमी बनने वाले लोग शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 90 प्रतिशत लाभार्थी पहली पीढ़ी के उद्यमी हैं। साथ ही, महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी यह योजना महत्वपूर्ण साबित हुई है, क्योंकि कुल लाभार्थियों में 44 प्रतिशत महिला उद्यमी हैं।

योजना के तहत मदद पाने वाले 75,000 से अधिक उद्यम अब उद्यम आधार, FSSAI और GST जैसे पंजीकरणों के माध्यम से औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन चुके हैं, जो पहले असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे थे।

'जॉब क्रिएटर' बनाने का संकल्प

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा, "पीएम मोदी ने देश के युवाओं से जॉब सीकर नहीं, जॉब क्रिएटर बनने का आह्वान किया था। पीएमएफएमई स्कीम उसी संकल्प को धरातल पर उतार रही है।" उन्होंने कहा कि यह योजना छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को ऋण, तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़कर उन्हें मजबूत बना रही है, जो आत्मनिर्भर भारत की वास्तविक शक्ति है।

चिराग पासवान ने योजना के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा, "जब हमने यह स्कीम शुरू की थी, तब हालात सामान्य नहीं थे... हम कोविड-19 संकट से गुजर रहे थे।" उन्होंने अपने पिता स्वर्गीय राम विलास पासवान का भी जिक्र किया, जो उस समय केंद्रीय कैबिनेट का हिस्सा थे। उन्होंने कहा कि उस मुश्किल दौर में लिए गए फैसलों ने आने वाले वर्षों में बड़ा बदलाव लाया, जिसका एक उदाहरण यह योजना है।

राज्यों के प्रदर्शन की सराहना

चिराग पासवान ने इस सफलता का श्रेय राज्यों के प्रयासों को भी दिया। उन्होंने बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के प्रदर्शन की विशेष रूप से सराहना की। मंत्री ने कहा, "यह उपलब्धि केवल जश्न मनाने का अवसर नहीं है। यह एक मजबूत नींव है, जिस पर हम भारत के खाद्य प्रसंस्करण विकास गाथा के अगले चरण का निर्माण करेंगे।" उन्होंने राज्य सरकारों, जिला प्रशासनों और जमीनी स्तर के अधिकारियों को एक राष्ट्रीय नीति को जमीनी आंदोलन में बदलने के लिए धन्यवाद दिया।

इनपुट: IANS

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