कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु के अधिकारों को लेकर लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव, केंद्र से निष्पक्ष भूमिका की मांग
कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेदातु परियोजना को लेकर तमिलनाडु के हितों की रक्षा का मुद्दा मंगलवार को लोकसभा में गूंजा। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने इस मामले पर सदन की…
कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेदातु परियोजना को लेकर तमिलनाडु के हितों की रक्षा का मुद्दा मंगलवार को लोकसभा में गूंजा। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने इस मामले पर सदन की नियमित कार्यवाही रोककर तत्काल चर्चा कराने के लिए एक स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया। उन्होंने कावेरी को तमिलनाडु की 'जीवनरेखा' बताते हुए राज्य के किसानों और निवासियों पर पड़ने वाले गहरे असर पर चिंता जताई।
प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया कि यह मुद्दा केवल एक नदी के पानी के बंटवारे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लाखों किसानों की आजीविका, कावेरी डेल्टा की कृषि और करोड़ों लोगों की पेयजल की जरूरतों से सीधे तौर पर जुड़ा है। सांसद ने कहा कि कावेरी पर किसी भी तरह का निर्माण, जिससे तमिलनाडु की ओर पानी का बहाव प्रभावित हो, राज्य के भविष्य के लिए एक सीधा खतरा है।
केंद्र सरकार के रुख पर चिंता
मणिकम टैगोर ने हाल ही में जलशक्ति राज्य मंत्री के एक बयान पर गहरी चिंता व्यक्त की, जिसे उन्होंने तमिलनाडु के लोगों के लिए 'निराशाजनक' बताया। मंत्री ने संसद में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार कर्नाटक को कावेरी पर किसी भी निर्माण के लिए निचले प्रवाह वाले राज्यों की सहमति लेना अनिवार्य नहीं है। सांसद ने आरोप लगाया कि केंद्र का यह दृष्टिकोण तमिलनाडु की वास्तविक और वैध चिंताओं को नजरअंदाज करता है। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ सहमति का नहीं, बल्कि कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण और सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित तमिलनाडु के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा का है।
तमिलनाडु के अधिकार और किसानों का भविष्य
स्थगन प्रस्ताव में टैगोर ने स्पष्ट किया कि किसी भी अंतरराज्यीय नदी पर कोई एक राज्य ऐसा एकतरफा कदम नहीं उठा सकता जिससे दूसरे राज्य के कानूनी अधिकार प्रभावित हों। उन्होंने जोर देकर कहा कि तमिलनाडु को संवैधानिक रूप से यह अधिकार है कि वह ऐसी किसी भी परियोजना का विरोध करे जो उसके हिस्से के पानी, जल सुरक्षा और किसानों के हितों पर प्रतिकूल असर डालती हो।
उन्होंने कहा, "तमिलनाडु के किसान कई दशकों से कावेरी जल विवाद के कारण अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। उन्हें इस डर में नहीं जीना चाहिए कि ऊपरी क्षेत्र में लिए गए एकतरफा फैसलों से उनकी खेती, आजीविका और भविष्य प्रभावित हो सकता है।" सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र के मौजूदा रुख से यह धारणा बन रही है कि वह संघीय व्यवस्था में अपनी निष्पक्ष भूमिका निभाने में विफल रहा है।
सरकार के समक्ष रखी गईं प्रमुख मांगें
सांसद मणिकम टैगोर ने अपने प्रस्ताव के माध्यम से केंद्र सरकार के सामने चार मुख्य मांगें रखी हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार यह स्पष्ट करे कि वह कावेरी बेसिन में तमिलनाडु के हितों की रक्षा कैसे करेगी। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाए कि ऐसी किसी भी परियोजना को मंजूरी न मिले जो तमिलनाडु को मिलने वाले पानी के हिस्से को प्रभावित करती हो। उन्होंने यह भी कहा कि मेकेदातु परियोजना पर अंतिम निर्णय से पहले तमिलनाडु की सभी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार हो और केंद्र एक निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाए।
इनपुट: IANS



