ISIS भर्ती मामला: NIA के बाद अब ED की एंट्री, बेंगलुरु में 8 ठिकानों पर छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कर्नाटक में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के लिए युवाओं की भर्ती से जुड़े एक मामले में अपनी जांच शुरू कर दी है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, यह कार्रवाई राष्ट्रीय जांच एजेंसी…
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कर्नाटक में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के लिए युवाओं की भर्ती से जुड़े एक मामले में अपनी जांच शुरू कर दी है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, यह कार्रवाई राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा दर्ज एक FIR के आधार पर की गई है, जिसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत मामला दर्ज किया है।
इसी सिलसिले में, ईडी की टीमें बेंगलुरु में 8 अलग-अलग जगहों पर तलाशी अभियान चला रही हैं। यह छापेमारी 'इकरा वेलफेयर ट्रस्ट', 'गाइडेंस फॉर मैनकाइंड' और मामले से जुड़े अन्य लोगों के ठिकानों पर की जा रही है।
आतंकी फंडिंग और भर्ती का आरोप
एनआईए ने अपनी FIR गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की कई गंभीर धाराओं के तहत दर्ज की थी। इनमें धारा 17 (आतंक के लिए फंड जुटाना), धारा 18 (आतंकवाद की साजिश रचना) और धारा 18बी (आतंक के लिए लोगों की भर्ती करना) शामिल हैं।
एनआईए इस मामले में पहले ही 4 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है और इरफान नासिर, अहमद अब्दुल कादर, मो. तौकीर महमूद, जुहाब हमीद शकील मन्ना और मो. शिहाब के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है। ईडी के अनुसार, चार्जशीट में बताया गया है कि सभी आरोपी प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS/ISIL से जुड़े थे।
कैसे काम करता था यह नेटवर्क?
जांच में सामने आया है कि इन लोगों ने बेंगलुरु के मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें ISIS में शामिल होने के लिए उकसाने की एक आपराधिक साजिश रची थी। इसके लिए वे 'इकरा कैंप' नाम से "पर्सनैलिटी डेवलपमेंट" वर्कशॉप और 'कुरान सर्कल' नाम से साप्ताहिक स्टडी सर्कल का आयोजन करते थे, जिसके जरिए युवाओं की पहचान कर उन्हें भर्ती किया जाता था।
ईडी ने बताया कि आरोपियों ने ट्रस्टों, लोगों और अपनी बचत से फंड इकट्ठा किया। इस पैसे का इस्तेमाल भर्ती किए गए युवाओं को तुर्की के रास्ते सीरिया भेजने में किया गया, ताकि वे वहां की सरकार के खिलाफ लड़ सकें। चार्जशीट में इसे "सीरिया के खिलाफ युद्ध छेड़ने" की साजिश बताया गया है। यह भी आरोप है कि समूह ने CAA/NRC विरोधी प्रदर्शनों से जुड़ी भावनाओं का फायदा उठाकर मुस्लिमों को गैर-मुस्लिमों के खिलाफ भड़काने की कोशिश की और सुरक्षित सोशल-मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए ISIS की विचारधारा का प्रसार किया। मामले में आगे की जांच जारी है।
इनपुट: IANS



