कारगिल विजय: जब 'ऑपरेशन सफेद सागर' ने हवा में लिखी भारत की जीत की कहानी
हर साल 26 जुलाई को मनाया जाने वाला कारगिल विजय दिवस सिर्फ ज़मीनी जंग में भारतीय सेना के शौर्य का प्रतीक नहीं, बल्कि आसमान में भारतीय वायुसेना द्वारा रचे गए एक सुनहरे अध्याय की भी याद दिलाता है…
हर साल 26 जुलाई को मनाया जाने वाला कारगिल विजय दिवस सिर्फ ज़मीनी जंग में भारतीय सेना के शौर्य का प्रतीक नहीं, बल्कि आसमान में भारतीय वायुसेना द्वारा रचे गए एक सुनहरे अध्याय की भी याद दिलाता है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, 26 मई 1999 को शुरू हुआ 'ऑपरेशन सफेद सागर' वह निर्णायक हवाई अभियान था, जिसने कारगिल युद्ध का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ज़मीन पर 'ऑपरेशन विजय' के तहत लड़ रही भारतीय सेना को हवाई सुरक्षा और मारक क्षमता प्रदान करना था।
यह अभियान दुनिया के सबसे ऊंचे और कठिन युद्धक्षेत्रों में से एक में अंजाम दिया गया। बर्फीली चोटियों, ऑक्सीजन की कमी और खराब मौसम के बावजूद, भारतीय वायुसेना ने अपनी असाधारण क्षमता का प्रदर्शन करते हुए कारगिल सेक्टर पर कब्जा जमाए पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ने में अहम भूमिका निभाई।
हवाई हमलों का पैमाना और प्रभाव
ऑपरेशन सफेद सागर के तहत भारतीय वायुसेना ने बेमिसाल तालमेल दिखाते हुए करीब 5000 स्ट्राइक मिशन, 350 टोही मिशन और लगभग 800 एस्कॉर्ट उड़ानें भरीं। इसके अतिरिक्त, घायल सैनिकों को निकालने और रसद पहुंचाने के लिए 2000 से अधिक हेलीकॉप्टर उड़ानें भी संचालित की गईं। इन समन्वित प्रयासों ने पाकिस्तानी सैनिकों की सप्लाई लाइन काट दी और उनके ठिकानों को भारी नुकसान पहुँचाया, जिससे भारतीय थल सेना को एक बड़ी सामरिक बढ़त मिली।
तकनीकी श्रेष्ठता और सर्वोच्च बलिदान
इस अभियान में मिग-21, मिग-23, मिग-27 और मिराज-2000 जैसे लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया। विशेषकर, मिराज-2000 विमानों ने लेजर-निर्देशित बमों से दुश्मन के बंकरों पर सटीक हमले कर युद्ध की दिशा बदल दी। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, 16,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर इस तरह की तकनीक का सफल प्रयोग भारतीय वायुसेना की तकनीकी कुशलता का प्रमाण था।
इस जीत की एक बड़ी कीमत भी चुकाई गई। 28 मई 1999 को 152 हेलीकॉप्टर यूनिट ('द माइटी आर्मर') के स्क्वाड्रन लीडर आर. पुंडीर, फ्लाइट लेफ्टिनेंट एस. मुहिलान, सार्जेंट पी.वी.एन.आर. प्रसाद और सार्जेंट आर.के. साहू ने टोलोलिंग क्षेत्र में एक मिशन के दौरान अपने प्राणों की आहुति दे दी, जब उनके हेलीकॉप्टर को दुश्मन की स्टिंगर मिसाइल ने निशाना बनाया। इन चारों वीरों को उनके अद्वितीय साहस के लिए मरणोपरांत वायु सेना पदक (वीरता) से सम्मानित किया गया।
इनपुट: IANS



