NSUI अध्यक्ष का NTA पर हमला: 'सरकार के भ्रष्टाचार का अड्डा बन गई है एजेंसी'
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर गंभीर सवाल उठाते हुए नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने इसे एक 'नाकाम संस्थान' बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि NTA सरकार के भ्रष्टाचार…
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर गंभीर सवाल उठाते हुए नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने इसे एक 'नाकाम संस्थान' बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि NTA सरकार के भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है और केवल राजनीतिक इशारों पर काम करता है। समाचार एजेंसी IANS से बुधवार को हुई बातचीत में जाखड़ ने कहा कि देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है और इसे रोकने के लिए NTA को तत्काल बैन किया जाना चाहिए।
उन्होंने हाल ही में रद्द हुई परीक्षाओं और पेपर लीक की घटनाओं का हवाला देते हुए NTA की कार्यप्रणाली पर गहरी चिंता जताई। जाखड़ ने कहा कि NEET पेपर लीक के कारण 25 से ज़्यादा छात्रों ने आत्महत्या कर ली थी, फिर भी एजेंसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। हाल ही में कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई को उन्होंने इस बात का सबूत बताया कि NTA में एक 'बड़ी खामी' मौजूद है।
UGC-NET और पुरानी परीक्षाओं के सवाल
विनोद जाखड़ ने UGC-NET परीक्षा में सामने आई खामियों को भी उजागर किया। उन्होंने बताया कि सोशियोलॉजी, मैथमेटिक्स और कॉमर्स के प्रश्नपत्रों में भारी गड़बड़ियां थीं। उनके अनुसार, “2024 के प्रश्न पत्र से इंग्लिश और कॉमर्स के अंदर करीब 70 प्रतिशत सवाल पुराने पेपर से आए थे।” उन्होंने सवाल उठाया कि NTA को यह तक नहीं पता कि कौन से प्रश्न पहले पूछे जा चुके हैं। इसके अलावा, सोशियोलॉजी के छात्रों ने पेपर पहले ही लीक हो जाने का आरोप लगाया था।
छात्रों के आंदोलन और मांगें
NSUI अध्यक्ष ने कहा कि जब तक NTA को बैन नहीं कर दिया जाता, उनका संगठन संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने छात्रों के लिए एक पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली बनाने की मांग की, जिसका संचालन एक सरकारी सिस्टम के तहत हो। जाखड़ ने रांची में हुए छात्र आंदोलन का भी ज़िक्र किया, जहाँ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रदर्शन के बाद छात्रों की मांगें मान ली थीं। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लगातार छात्रों का समर्थन किया है और NTA पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
जाखड़ ने स्पष्ट किया, “कब तक छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होता रहेगा? छात्र जब आंदोलन करते हैं, अपने अधिकार की मांग करते हैं, तब उनको नक्सलवादी या नक्सल दिमागी कहा जाता है।” उन्होंने कहा कि देश में पेपर लीक के खिलाफ एक मजबूत कानून बनाने और ध्वस्त हो चुके शिक्षा तंत्र के पुनर्निर्माण की तत्काल आवश्यकता है।
इनपुट: IANS



