लोन धोखाधड़ी का आरोप: CBI ने जेनसोल इंजीनियरिंग और उसके प्रमोटरों के खिलाफ दर्ज की FIR
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इलेक्ट्रिक वाहन (EV) से जुड़ी कंपनी जेनसोल इंजीनियरिंग लिमिटेड, जेनसोल ईवी लीज लिमिटेड और इसके प्रमोटरों के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने कंपनी के प्रमोटरों…
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इलेक्ट्रिक वाहन (EV) से जुड़ी कंपनी जेनसोल इंजीनियरिंग लिमिटेड, जेनसोल ईवी लीज लिमिटेड और इसके प्रमोटरों के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने कंपनी के प्रमोटरों अनमोल सिंह जग्गी, पुनीत सिंह जग्गी और अन्य अज्ञात लोगों के विरुद्ध लोन की रकम के कथित दुरुपयोग और गबन के मामले में FIR दर्ज की है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह कार्रवाई इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी लिमिटेड (IREDA) की शिकायत पर की गई है। IREDA ने जेनसोल इंजीनियरिंग को 3,000 इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए 267.79 करोड़ रुपए का कर्ज मंजूर किया था। हालांकि, बाद में कराए गए एक फोरेंसिक ऑडिट में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद CBI से शिकायत की गई।
ऑडिट में क्या खुलासे हुए?
IREDA द्वारा 20 जनवरी को पेश की गई फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, कर्ज लेने वाली कंपनियों के वित्तीय लेन-देन में कई गड़बड़ियां मिलीं। ऑडिट में पाया गया कि 3,000 वाहनों के लिए लोन दिए जाने के बावजूद केवल 1,549 वाहनों को ही वास्तव में खरीदा गया, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 191.65 करोड़ रुपए थी। इसके अलावा, खरीद से जुड़े बिल (इनवॉइस), सीएसटी रिकॉर्ड, बीमा और वाहनों के रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों में भी कई खामियां पाई गईं। शिकायत में कहा गया है कि इन विसंगतियों से जाली बिल बनाने, काल्पनिक खरीद दिखाने और कर्ज की रकम को दूसरी जगह इस्तेमाल करने का संदेह पैदा होता है।
फर्जी दस्तावेजों का भी आरोप
शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों (केयर रेटिंग्स और आईसीआरए) को IREDA के नाम से जारी किए गए फर्जी पत्र सौंपे गए। IREDA ने साफ किया कि ये पत्र उसके अधिकारियों ने जारी नहीं किए थे। एक हस्ताक्षर विशेषज्ञ ने भी इन पत्रों पर मौजूद दस्तखत को फर्जी करार दिया है। इसके अतिरिक्त, महाजेनको से मिले 137.40 करोड़ रुपए को भी निर्धारित खाते (TRA) के बजाय गैर-परियोजना कार्यों और अन्य संबंधित पक्षों को भुगतान के लिए इस्तेमाल किया गया।
बकाया और जांच का जिम्मा
IREDA के मुताबिक, 30 जून 2026 तक जेनसोल इंजीनियरिंग लिमिटेड पर 453.77 करोड़ रुपए और जेनसोल ईवी लीज लिमिटेड पर 218.97 करोड़ रुपए का मूलधन बकाया था, जिसमें ब्याज और अन्य शुल्क शामिल नहीं हैं। नई दिल्ली स्थित CBI की एंटी-करप्शन ब्रांच ने 31 जुलाई 2026 को यह FIR दर्ज की है। मामले की जांच का जिम्मा पुलिस उपाधीक्षक चंदन कुमार सिंह को सौंपा गया है और CBI की आगे की कार्रवाई जारी है।
इनपुट: IANS



