झारखंड: 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द होने पर चयनित अभ्यर्थी हाईकोर्ट पहुंचे, सरकार के फैसले को दी चुनौती
झारखंड में सरकार द्वारा 22 नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ चयनित अभ्यर्थियों ने अब कानूनी रास्ता अख्तियार कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, प्रभावि…
झारखंड में सरकार द्वारा 22 नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ चयनित अभ्यर्थियों ने अब कानूनी रास्ता अख्तियार कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, प्रभावित उम्मीदवारों ने झारखंड हाईकोर्ट में सरकार के इस निर्णय को चुनौती देते हुए तीन अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। इन याचिकाओं पर त्वरित सुनवाई की मांग की गई है, हालांकि अभी तक ये सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई हैं।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब झारखंड सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली की सीआईडी और एसआईटी जांच के आधार पर बड़े पैमाने पर नियुक्तियां रद्द करने का निर्णय लिया। रद्द की गई परीक्षाओं में जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, जेएसएससी-सीजीएल, सिविल जज, डिप्टी कलेक्टर और फूड सेफ्टी ऑफिसर समेत कई अन्य महत्वपूर्ण पद शामिल थे।
न्याय के सिद्धांत का हवाला
मंगलवार और बुधवार को दाखिल की गई इन याचिकाओं में अवधेश कुमार, दीपमाला, सोनम कुमारी और सौरभ सिंह जैसे कई सफल अभ्यर्थी शामिल हैं। उनका मुख्य तर्क यह है कि सरकार ने उनका पक्ष सुने बिना एकतरफा कार्रवाई की है, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए परीक्षा पास की और मेरिट के आधार पर नियुक्ति पाई।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से गुहार लगाई है कि अगर जांच में कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो कार्रवाई सिर्फ उसी पर होनी चाहिए, न कि सभी सफल उम्मीदवारों पर। फैसले से उन सैकड़ों अभ्यर्थियों पर सीधा संकट आ गया है, जो चयन के बाद सरकारी सेवा में योगदान भी दे चुके थे और अब उनकी नौकरी खतरे में है।
हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें
जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के मामले में कुछ याचिकाकर्ताओं ने यह भी दलील दी है कि परीक्षा के परिणाम हाईकोर्ट के ही पूर्व आदेशों के बाद जारी हुए थे। ऐसे में सरकार द्वारा पूरी परीक्षा को बाद में रद्द किए जाने की वैधानिकता पर भी सवाल उठाए गए हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट क्या रुख अपनाता है।
इनपुट: IANS



