झारखंड: सरकारी भरोसे पर छात्रों ने JPSC-JSSC आंदोलन दो महीने के लिए टाला, लेकिन रखीं ये शर्तें
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ 26 दिनों से चल रहा छात्र आंदोलन फिलहाल दो महीने के लिए स्थगित कर दिया गया है। सरकार से मिले आश्वासनों के बाद जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच…
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ 26 दिनों से चल रहा छात्र आंदोलन फिलहाल दो महीने के लिए स्थगित कर दिया गया है। सरकार से मिले आश्वासनों के बाद जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने बुधवार को यह फैसला लिया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रों ने कहा है कि उन्होंने सरकार पर एक बार फिर भरोसा जताया है और उम्मीद है कि इस बार यह टूटेगा नहीं।
छात्रों ने चेतावनी भी दी है कि अगर सरकार की जांच प्रक्रिया में कोई लापरवाही या पक्षपात हुआ, तो वे फिर से सड़कों पर उतरेंगे। मंच की ओर से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि सरकार ने कैबिनेट में परीक्षाओं में अनियमितता की बात स्वीकार करते हुए कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं, जिसके बाद आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय हुआ।
जांच और कानूनी कार्रवाई पर छात्रों की नज़र
आंदोलनकारी छात्रों ने मांग की ہے कि जांच न्यायिक निगरानी में और पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। उनका उद्देश्य केवल परीक्षा रद्द कराना नहीं, बल्कि गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन पर कार्रवाई सुनिश्चित करना है। छात्रों ने कहा कि सरकार ने इन मामलों पर अदालत जाने की बात कही है, इसलिए उन्हें कोर्ट में भी पूरी मजबूती से छात्रों का पक्ष रखना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो इसे छात्रों के साथ धोखा माना जाएगा।
अन्य मांगें और भविष्य की रणनीति
छात्रों ने आंदोलन के दौरान उन पर दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लेने की भी मांग की ਹੈ। उनका कहना ਹੈ कि उन्होंने अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन किया تھا। इसके अलावा, मंच ने पीजीटी परीक्षा को भी रद्द कर उसकी जांच कराने की मांग की है, जिसमें कथित तौर पर अनियमितता के कई तथ्य सार्वजनिक हैं। नगरपालिका भर्ती परीक्षा के लगभग 90% कटऑफ पर भी सवाल उठाते हुए इसकी भी जांच की मांग की गई है। छात्रों ने यह भी कहा कि अगर जांच की वजह से भर्ती प्रक्रिया में देरी होती है, तो उन उम्मीदवारों को भी मौका मिलना चाहिए जिनकी उम्र इस दौरान निकल गई हो।
इनपुट: IANS



