बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत, KCR की बेटी कविता बोलीं- 'देश नए विकल्प तलाश रहा है'
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार को हराकर जीत दर्ज की है। इस चुनावी नतीजे पर देशभर से राजनीतिक…
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार को हराकर जीत दर्ज की है। इस चुनावी नतीजे पर देशभर से राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, जिसमें तेलंगाना की टीआरएस नेता के. कविता ने इसे भारतीय राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत बताया है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, के. कविता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर प्रशांत किशोर को बधाई देते हुए कहा कि देश के लोग अब नए विचारों और जवाबदेह शासन पर आधारित राजनीतिक विकल्पों की तलाश में हैं। उन्होंने लिखा, "यह परिणाम भारतीय राजनीति में एक व्यापक बदलाव को दर्शाता है... आपकी नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं।"
चुनाव परिणाम और जीत का अंतर
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 31 दौर की मतगणना के बाद प्रशांत किशोर को कुल 63,203 वोट मिले। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी, भाजपा के नीरज कुमार को 18,953 मतों के अंतर से हराया, जिन्हें 44,250 वोट प्राप्त हुए। इस मुकाबले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की उम्मीदवार रेखा कुमारी गुप्ता 14,085 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
प्रशांत किशोर ने बताया जनता का संदेश
जीत के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर की जनता ने भाजपा नेतृत्व को एक स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोग अब शिक्षा, रोजगार और सुशासन पर केंद्रित सक्षम नेतृत्व चाहते हैं। किशोर ने यह भी साफ किया कि उनका मुख्य उद्देश्य बिहार में रोजगार के अवसर पैदा करना है, ताकि राज्य के युवाओं को पलायन के लिए मजबूर न होना पड़े।
राजद में नतीजों पर अलग-अलग राय
प्रशांत किशोर की इस जीत पर राजद नेताओं ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। एक ओर जहां राजद नेता रोहिणी आचार्य ने इसे 'जनता के लोकतांत्रिक विश्वास की जीत' बताते हुए किशोर को बधाई दी, वहीं दूसरी ओर राजद सांसद मीसा भारती ने एक अलग दृष्टिकोण पेश किया। मीसा भारती ने कहा कि तकनीकी रूप से भले ही भाजपा उम्मीदवार की हार हुई हो, लेकिन इसे भाजपा की 'राजनीतिक जीत' के रूप में भी देखा जा सकता है। उन्होंने प्रशांत किशोर के चुनावी वादों पर सवाल उठाते हुए यह भी दावा किया कि उनमें से कई वादे किसी विधायक या सांसद के अधिकार क्षेत्र से बाहर के हैं।
इनपुट: IANS



