जेपीएससी परीक्षा विवाद: सीआईडी की बड़ी कार्रवाई, ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को ठेका देने की भी जांच
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के नतीजों में कथित धांधली के मामले में सीआईडी की जांच तेज हो गई है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, मंगलवार को जेपीएससी…
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के नतीजों में कथित धांधली के मामले में सीआईडी की जांच तेज हो गई है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, मंगलवार को जेपीएससी मुख्यालय और परीक्षा कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल के दफ्तरों समेत आठ जगहों पर छापेमारी के बाद आठ लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ जारी है।
हिरासत में लिए गए लोगों में जेपीएससी की सहायक परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और परीक्षा एजेंसी टीडीपीएल के निदेशक सत्यपाल सिंह और रामबीर सिंह शामिल हैं। इनके अलावा, कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी और आयोग की गोपनीय व कंप्यूटर शाखाओं से जुड़े तीन अन्य कर्मचारियों से भी सीआईडी अलग-अलग पूछताछ कर रही है।
छापेमारी और डिजिटल जांच
जांच एजेंसी ने छापेमारी के दौरान जेपीएससी और टीडीपीएल के दफ्तरों से कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज जब्त किए हैं। इनमें परीक्षा से संबंधित कंप्यूटर, सीपीयू, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, सर्वर डेटा, ओएमआर स्कैनिंग रिकॉर्ड और मेरिट सूची से जुड़ी फाइलें शामिल हैं। सीआईडी की टीम अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या परिणाम तैयार होने के बाद किसी तरह की डिजिटल छेड़छाड़ या ओएमआर डेटा में हेरफेर की गई थी। इसके लिए सर्वर लॉग फाइल, डिजिटल एक्सेस हिस्ट्री और डेटा ट्रांजैक्शन का विश्लेषण किया जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि जब्त किए गए सभी डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है। विशेषज्ञ डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने का प्रयास करेंगे और यह भी जांचेंगे कि क्या कोई गोपनीय डेटा बाहरी स्टोरेज डिवाइस में ट्रांसफर किया गया था।
विवादों में घिरी परीक्षा एजेंसी
इस जांच का एक अहम पहलू परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी टीडीपीएल का चयन भी है। गौरतलब है कि टीडीपीएल को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) ने मई 2025 में ही अनियमितताओं और गोपनीयता में चूक के चलते ब्लैकलिस्ट कर दिया था। इसके बावजूद राज्य की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा का जिम्मा इसी एजेंसी को क्यों और किन परिस्थितियों में दिया गया, सीआईडी अब इसकी भी पड़ताल कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद से ही अभ्यर्थी लगातार धांधली का आरोप लगा रहे थे। उनकी मुख्य शिकायतें थीं कि परिणाम बिना कट-ऑफ अंक के जारी किया गया, मेरिट सूची पर अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं थे और ओएमआर शीट भी उपलब्ध नहीं कराई गई। छात्रों के विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक दलों के दबाव के बाद राज्य सरकार ने मामले की सीआईडी जांच के आदेश दिए थे।
इनपुट: IANS



