जेपीएससी परीक्षा विवाद: बाबूलाल मरांडी ने घोटाले का आरोप लगाया, सीबीआई जांच की मांग की
झारखंड में 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा (JPSC) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इसे एक 'सुनियोजित घोटाला' बताते हुए पूरे…
झारखंड में 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा (JPSC) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इसे एक 'सुनियोजित घोटाला' बताते हुए पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य की हेमंत सोरेन सरकार सीआईडी जांच की आड़ में असली दोषियों को बचाने की कोशिश कर रही है।
रांची स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक संगठित भ्रष्टाचार है, जहां प्रारंभिक परीक्षा से लेकर साक्षात्कार तक, हर स्तर पर अभ्यर्थियों से अवैध वसूली की जाती है।
जांच प्रक्रिया और अधिकारियों पर सवाल
मरांडी ने जांच की मौजूदा दिशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण कानून की धाराएं नहीं लगाई गई हैं और प्राथमिकी (FIR) भी सामान्य धाराओं में दर्ज की गई है, जिससे आरोपियों को कानूनी फायदा मिल सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि एफआईआर को अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इसके अलावा, उन्होंने जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते के इस्तीफे को अपर्याप्त बताते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उनकी भूमिका की भी जांच की मांग की। मरांडी ने जनवरी की एक घटना का जिक्र करते हुए दावा किया कि कर्नाटक के एक छात्र ने उस समय के जेपीएससी अध्यक्ष को ओएमआर शीट में गड़बड़ी और पैसे मांगे जाने की लिखित शिकायत दी थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सरकार को सीधी चुनौती
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को चुनौती देते हुए कहा कि अगर इस मामले में सरकार की कोई संलिप्तता नहीं है, तो उसे खुद ही जांच सीबीआई को सौंप देनी चाहिए। उन्होंने जेएसएससी सीजीएल परीक्षा मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भी सीआईडी जांच से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला था। मरांडी ने चेतावनी दी कि यदि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता नहीं लाई गई, तो राज्य के युवा आंदोलन करने पर मजबूर हो जाएंगे।
इनपुट: IANS



