JNMC के तीन डॉक्टरों पर हत्या के प्रयास में एफआईआर: AMU में सीएमओ ऑफिस का गेट तोड़ा, इमरजेंसी सेवाएं तीसरे दिन भी बंद – Aligarh News h3>
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों और तीमारदारों में हुई मारपीट के बाद तीसरे दिन भी इमरजेंसी सेवाएं बंद हैं। इस मामले में थाना सिविल लाइंस में तीन जूनियर डॉक्टरों मोहम्मद तल्हा खुर्शीद, डॉ. शाहवेज और डॉ. अकील हुसैन के खिलाफ दौड़ा–दौड़ाकर पीटने और जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज की गई है। उधर, एफआईआर के विरोध में डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। जानकारी पर पहुंचे एएमयू प्रॉक्टर प्रो. नवेद खान के साथ अभद्रता कर सीएमओ ऑफिस का गेट तोड़ दिया। इस मामले में एएमयू प्रशासन ने तीनों डॉक्टरों को निलंबित कर दिया है। डॉक्टर पर थप्पड़ मारने का आरोप शाहजमाल के माबूद नगर निवासी अफजाल अपनी पत्नी शबाना के पैर में मोच आने पर इलाज कराने ट्रामा सेंटर पहुंचे थे। उनके साथ उनके दो बेटे शानू और अनस भी मौजूद थे। आरोप है कि जब अफजाल ने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों से इलाज शुरू करने का अनुरोध किया, तो डॉक्टरों ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। जब बेटे शानू ने इसका विरोध किया तो एक डॉक्टर ने उसे थप्पड़ जड़ दिया। इसके बाद वहां मौजूद अन्य जूनियर डॉक्टर और कर्मचारी उग्र हो गए और उन्होंने लोहे की रॉड व अन्य उपकरणों से परिवार पर हमला बोल दिया। परिवार को घेरकर पीटा, महिला से भी बदसलूकी पीड़ित परिवार का आरोप है कि डॉक्टरों ने न सिर्फ युवकों को जमीन पर गिरा-गिराकर पीटा, बल्कि बीच-बचाव करने आई महिला शबाना को भी नहीं बख्शा। जब प्रॉक्टोरियल टीम ने स्थिति को भांपते हुए परिवार को सुरक्षित स्ट्रेचर रूम में बैठाया, तो दर्जनों की संख्या में डॉक्टर वहां भी पहुंच गए और दोबारा हमला कर दिया। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि इसी हंगामे के दौरान उनसे 15 हजार रुपए और जरूरी दस्तावेज भी छीन लिए गए। प्रशासन और पुलिस से अभद्रता, तोड़ा गेट हंगामे की जानकार पर थाना सिविल लाइंस पुलिस और प्रॉक्टोरियल टीम भी मौके पर पहुंच गई। गुस्साए डॉक्टरों ने सीएमओ ऑफिस का गेट तोड़ दिया और वहां मौजूद अधिकारियों के साथ गाली-गलौज की। प्रॉक्टर प्रो. मो. नवेद के साथ भी अभद्रता की गई और उन पर हमले का प्रयास किया गया। मौके पर पहुंची पुलिस के साथ भी डॉक्टरों ने बदसलूकी की। करीब दो घंटे तक ट्रामा सेंटर में अराजकता का माहौल रहा, जिससे वहां भर्ती अन्य मरीजों में दहशत फैल गई। पुलिस की कार्रवाई और डॉक्टरों की दलील मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने डॉ. तलहा, डॉ. आकिल और डॉ. शहवाज सहित करीब 10 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास व अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से तीनों नामजद डॉक्टरों को निलंबित कर दिया है। दूसरी तरफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। आरडीए का कहना है कि विवाद तीमारदारों द्वारा एक जूनियर महिला डॉक्टर को चांटा मारने से शुरू हुआ था। मारपीट में डॉ. शौर्य को भी गंभीर चोटें आई हैं। डॉक्टरों की मांग है कि उनका निलंबन वापस लिया जाए और सहायक प्रॉक्टर फराज फारूक को उनके पद से हटाया जाए। 15 दिन में दूसरी हड़ताल इस घटना के बाद जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल शुरू कर दी। इससे इमरजेंसी और ओपीडी सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं। 15 दिन के भीतर यह दूसरी बार है जब जेएन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर काम छोड़कर सड़कों पर उतरे हैं। बुधवार को हाथरस और आसपास के क्षेत्रों से आए सैकड़ों मरीज बिना इलाज के वापस जाने को मजबूर हुए। अस्पताल में भर्ती गंभीर मरीजों को भी ट्रामा सेंटर से बाहर निकाल दिया गया, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। जांच में यह भी सामने आया है कि ट्रामा सेंटर के सीसीटीवी कैमरे केवल लाइव फीड दिखाते हैं, उनमें रिकॉर्डिंग की सुविधा नहीं मिली, जिसे पुलिस एक बड़ी लापरवाही मान रही है। फिलहाल, अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और भारी पुलिस बल तैनात है।
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