बुधवार, 24 जून 2026 · नई दिल्ली
Breaking News Hindi

विशेष -जिसकी यूपी उसका देश

दिल्ली की गद्दी पर अगर किसी पार्टी को काबिज होना है तो सीटों की दृष्टि सबसे ज़रूरी राज्य उत्तर प्रदेश ही होता है, और उत्तर प्रदेश की राजनीति जिस तरफ भी झुकेगी,…

विशेष -जिसकी यूपी उसका देश

दिल्ली की गद्दी पर अगर किसी पार्टी को काबिज होना है तो सीटों की दृष्टि सबसे ज़रूरी राज्य उत्तर प्रदेश ही होता है, और उत्तर प्रदेश की राजनीति जिस तरफ भी झुकेगी, पलड़ा उधर का ही भारी होगा. पिछले लोकसभा चुनाव की बात करें तो भाजपा ने अपने सहयोगी(अपना दल) के साथ मिलकर लगभग सभी अन्य दलों का सूपड़ा साफ कर दिया था. 80 में से 73 सीटें जीतना अपने आप में एक रिकॉर्ड जीत थी. लेकिन अगर वर्तमान परिस्थितियों की जानिब से बात करेंगे तो पाएंगे की अबकी बार खेल के मोहरे अलग जगहों पर खड़े हैं.

विज्ञापन
Akhilesh 7

सपा-बसपा गठबंधन

उत्तर प्रदेश की दो सबसे बड़ी पार्टियाँ, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन इस बार के लोकसभा चुनाव की सबसे बड़ी चाभी साबित हो सकती है. दोनों दलों के वोट बैंक की अगर बात की जाय तो ओबीसी और पिछड़ा वर्ग का झुकाव इनकी ही तरफ है. 2014 के चुनाव में दोनों पार्टियाँ लगभग 35 सीटों पर दूसरे नंबर पर बेहद कम आंकड़ो से थी. अगर ये गठबंधन का दांव सही चला तो फिर किसी भी पार्टी को केंद्र में सरकार बनाने के लिए सपा-बसपा का हाथ थामना पड़ सकता है. अब यह देखा दिलचस्प होगा कि क्या सपा-बसपा मिलकर मतदाताओं का रुख बदलने में कामयाब होती है?

Congress 18

प्रियंका गाँधी की एंट्री

उत्तर प्रदेश की राजनैतिक स्थिति को देखते हुए ही शायद कांग्रेस पार्टी ने प्रियंका गाँधी की सक्रिय राजनीति में एंट्री करवाई है, अब देखना यह होगा की अपनी छवि(जो कि लगभग इंदिरा गाँधी से मेल खाती है) को वह कितना भुना पाती हैं. फिलहाल अभी प्रियंका गाँधी प्रयागराज से बनारस तक की यात्रा में चुनावी रैलियां और प्रचार करने में व्यस्त हैं. बनारस से वैसे भी भाजपा का ही गढ़ है, देखा ये होगा की कांग्रेस की तुरप का इक्का क्या कमाल दिखा पाता है.

अब बाकी आगे क्या होगा, क्या ये गठबंधन उत्तर प्रदेश की राजनीति में कोई गुल खिला पाते हैं, ये सब तो 23 मई को चुनाव नतीजे आने के बाद ही पता चलेगा.

S

Shekhar

शेखर News4Social के राजनीतिक संवाददाता हैं। वे चुनाव, राजनीति और राष्ट्रीय घटनाक्रम पर रिपोर्ट करते हैं, और विश्लेषण को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाते हैं। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →