झारखंड राज्य अभिलेखागार की बदहाली: 32 में से सिर्फ एक कर्मचारी, हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा
झारखंड के गौरवशाली इतिहास और प्रशासनिक यात्रा के अमूल्य दस्तावेज़ों को सहेजने वाला रांची स्थित राज्य अभिलेखागार खुद अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार…
झारखंड के गौरवशाली इतिहास और प्रशासनिक यात्रा के अमूल्य दस्तावेज़ों को सहेजने वाला रांची स्थित राज्य अभिलेखागार खुद अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, संस्थान में स्वीकृत 32 पदों में से 31 पद वर्षों से खाली पड़े हैं और पूरा अभिलेखागार महज एक कर्मचारी के भरोसे चल रहा है। इस गंभीर स्थिति पर झारखंड हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
यह मामला तब सामने आया जब शशि सागर वर्मा द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के वकील शैलेश पोद्दार ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की पीठ को बताया कि कर्मचारियों की भारी कमी के कारण राज्य के सबसे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड रूम की हालत खस्ता है।
दस्तावेजों के संरक्षण पर संकट
अदालत को जानकारी दी गई कि इस अभिलेखागार में रियासतकालीन दुर्लभ पट्टे, ऐतिहासिक भू-अभिलेख और कई प्राचीन नक्शे मौजूद हैं, जिनका प्रशासनिक, न्यायिक और ऐतिहासिक महत्व है। स्टाफ की कमी के चलते न तो नए दस्तावेज़ों की सूची तैयार हो पा रही है और न ही पुराने और खराब हो रहे पन्नों का डिजिटलीकरण संभव हो पा रहा है।
याचिका में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि जब तक स्थाई नियुक्तियां नहीं हो जातीं, तब तक इन ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट होने से बचाने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।
अदालत का निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 1 अक्टूबर, 2026 तक एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। सरकार को इसमें यह स्पष्ट करना होगा कि इन खाली पदों को भरने और अभिलेखागार के आधुनिकीकरण के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। अदालत इस मामले पर अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को करेगी।
इनपुट: IANS



