झारखंड: अवैध अफीम की खेती पर बड़ी कार्रवाई, एक साल में 22,400 एकड़ से ज़्यादा की कमी
झारखंड में अवैध अफीम की खेती के खिलाफ पुलिस के अभियान ने बड़े सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं। राज्य सीआईडी मुख्यालय द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में इस साल अवैध अफीम की खेती…
झारखंड में अवैध अफीम की खेती के खिलाफ पुलिस के अभियान ने बड़े सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं। राज्य सीआईडी मुख्यालय द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में इस साल अवैध अफीम की खेती के रकबे में लगभग 22,400 एकड़ की भारी कमी दर्ज की गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह नशे के कारोबार पर एक महत्वपूर्ण लगाम को दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025-26 के दौरान पुलिस ने राज्य भर में कुल 4,619.34 एकड़ में लगी अवैध अफीम की फसल को नष्ट किया है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष (2024-25) में চিহ্নিত 27,015.03 एकड़ की तुलना में बहुत कम है, जो अभियान की सफलता को प्रमाणित करता है।
इस साल की कार्रवाई का ब्योरा
वर्ष 2025-26 में हुई कार्रवाई के दौरान, पुलिस ने अफीम की अवैध खेती से जुड़े कुल 77 मामले दर्ज किए और 48 लोगों को गिरफ्तार किया। सबसे बड़ा अभियान चतरा जिले में चलाया गया, जहाँ अकेले 2,742.22 एकड़ में लगी फसल को नष्ट किया गया। अन्य प्रमुख जिलों में लातेहार (832.14 एकड़), हजारीबाग (393 एकड़), पलामू (314.62 एकड़) और खूंटी (215.71 एकड़) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, पश्चिमी सिंहभूम, रांची, सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा, लोहरदगा, कोडरमा और देवघर में भी छोटे पैमाने पर फसलें नष्ट की गईं।
पिछले वर्षों के आंकड़े और तुलना
राज्य सीआईडी के रिकॉर्ड यह भी दिखाते हैं कि पिछले वर्ष 2024-25 में, खूंटी जिला अफीम की खेती का सबसे बड़ा केंद्र था, जहाँ 15,246.79 एकड़ फसल पाई गई थी। उस वर्ष कुल 313 मामले दर्ज हुए थे और 237 गिरफ्तारियाँ हुई थीं। इससे पहले के वर्षों में, 2021-22 में 2,871.02 एकड़, 2022-23 में 5,494.10 एकड़ और 2023-24 में 4,853.99 एकड़ में अवैध फसल नष्ट की गई थी। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राज्य में अफीम की खेती एक गंभीर समस्या रही है, जिस पर अब अंकुश लगता दिख रहा है।
इनपुट: IANS



