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झारखंड: छंटनीग्रस्त जनगणना कर्मियों को पेंशन का हक़, हाईकोर्ट ने 2004 से सेवा गिनने का दिया आदेश

दशकों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे झारखंड के छंटनीग्रस्त जनगणना कर्मचारियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने एक अहम फैसले में राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इन कर्मचारियों की…

झारखंड: छंटनीग्रस्त जनगणना कर्मियों को पेंशन का हक़, हाईकोर्ट ने 2004 से सेवा गिनने का दिया आदेश
(फोटो: IANS)

दशकों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे झारखंड के छंटनीग्रस्त जनगणना कर्मचारियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने एक अहम फैसले में राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इन कर्मचारियों की सेवा की गणना 3 नवंबर 2004 से की जाए, ताकि उन्हें पेंशन का लाभ मिल सके। प्रशासनिक देरी के कारण इन कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देर से मिले थे, जिस वजह से वे पेंशन के लिए ज़रूरी 10 साल की सेवा पूरी नहीं कर पा रहे थे।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह मामला उन 602 कर्मचारियों से जुड़ा है, जिन्हें 1991-92 में गृह मंत्रालय के अधीन देवघर क्षेत्रीय जनगणना कार्यालय में संविदा पर रखा गया था। सितंबर 1992 में कार्यालय बंद होने पर उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। बाद में, झारखंड सरकार ने 3 नवंबर 2004 को एक संकल्प जारी कर इन कर्मियों को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के खाली पदों पर समायोजित करने का निर्णय लिया।

देरी सरकार की, नुकसान कर्मचारी का क्यों?

सरकारी संकल्प के बावजूद, इन कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र जारी करने में 6 से 8 साल की अत्यधिक देरी हुई। इस वजह से वे 2010 से 2012 के बीच ही नौकरी ज्वाइन कर पाए। नतीजतन, जब वे सेवानिवृत्त हुए तो उनकी कुल सेवा केवल 7 से 8 साल की ही हो सकी। झारखंड पेंशन नियमावली के अनुसार, पेंशन के लिए कम से कम 10 वर्ष की सेवा अनिवार्य है। इसी नियम का हवाला देकर सरकार ने उन्हें पेंशन देने से इनकार कर दिया था।

समानता के अधिकार का उल्लंघन

चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने सरकार की इस दलील को तो माना कि 1991-92 की संविदा सेवा को पेंशन में नहीं जोड़ा जा सकता। हालांकि, पीठ ने इस बात पर गौर किया कि सरकार की अपनी देरी के कारण कर्मचारियों के बीच भेदभाव हुआ। इसी श्रेणी के कई अन्य कर्मचारियों को 2007 में ही नियुक्ति मिल गई थी और वे 10 साल की सेवा पूरी करके पेंशन के हकदार बन गए।

अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन करार देते हुए कहा कि प्रशासनिक विलंब का खामियाजा कर्मचारियों को नहीं भुगतना चाहिए। हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि इन कर्मचारियों की सेवा की गणना 3 नवंबर 2004 से ही की जाएगी, जिससे वे पेंशन के लिए पात्र हो जाएंगे।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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