बुधवार, 19 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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JPSC सदस्य जमाल अहमद की संपत्ति पर उठे सवाल, बाबूलाल मरांडी ने CM को पत्र लिखकर ACB जांच की मांग की

झारखंड में लोक सेवा आयोग (JPSC) एक बार फिर विवादों में है। इस बार आयोग के सदस्य जमाल अहमद पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य…

JPSC सदस्य जमाल अहमद की संपत्ति पर उठे सवाल, बाबूलाल मरांडी ने CM को पत्र लिखकर ACB जांच की मांग की
(फोटो: IANS)

झारखंड में लोक सेवा आयोग (JPSC) एक बार फिर विवादों में है। इस बार आयोग के सदस्य जमाल अहमद पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर अहमद की संपत्तियों की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से जांच कराने की मांग की है।

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मरांडी ने अपने पत्र में दावा किया है कि जमाल अहमद ने JPSC सदस्य के पद का दुरुपयोग करते हुए काफी चल और अचल संपत्ति बनाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अहमद के पास रांची में एक बड़ा फ्लैट है और वे शहर में एक और फ्लैट खरीदने की तैयारी में हैं। इसके अतिरिक्त, हजारीबाग में भी उनके नाम पर या बेनामी संपत्ति होने की बात कही गई है।

नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल

बाबूलाल मरांडी ने जमाल अहमद की पुरानी नियुक्तियों को लेकर भी गंभीर प्रश्न उठाए हैं। पत्र में उल्लेख किया गया है कि अहमद पहले एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे और 2008 में उनकी नियुक्ति लेक्चरर के पद पर हुई थी। उस नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच पहले से ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है। मरांडी का तर्क है कि जिस व्यक्ति की अपनी नियुक्ति ही जांच के घेरे में हो, उसे JPSC जैसी संवैधानिक संस्था का सदस्य बनाना उचित नहीं था।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम के दबाव में नियमों की अनदेखी कर जमाल अहमद को आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया था। मरांडी के अनुसार, इस तरह की नियुक्तियों से आयोग की निष्पक्षता पर असर पड़ता है और राज्य के युवाओं का भरोसा टूटता है।

तत्काल पद से हटाने की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि जमाल अहमद के सभी बैंक खातों, निवेश, आय के स्रोतों और चल-अचल संपत्तियों की ACB से विस्तृत जांच कराई जाए। उन्होंने यह आशंका भी जताई है कि पद पर बने रहने से जांच प्रभावित हो सकती है, इसलिए अहमद को तत्काल JPSC सदस्य के पद से हटाया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को लेकर हुए विवाद के बाद JPSC की कार्यप्रणाली पहले से ही जांच के दायरे में है। इस मामले की जांच CID कर रही है और आयोग से जुड़े कई अधिकारियों पर कार्रवाई भी हो चुकी है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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