JPSC भर्ती घोटाला: CID जांच के बीच सिविल सेवा मेन्स समेत सभी आगामी परीक्षाएं स्थगित
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने अपनी सभी आगामी परीक्षाओं को अगले आदेश तक के लिए स्थगित कर दिया है। इसमें बहुप्रतीक्षित 14वीं संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा-2025 भी शामिल है। यह बड़ा फैसला उस वक्त आया…
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने अपनी सभी आगामी परीक्षाओं को अगले आदेश तक के लिए स्थगित कर दिया है। इसमें बहुप्रतीक्षित 14वीं संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा-2025 भी शामिल है। यह बड़ा फैसला उस वक्त आया है जब आयोग की प्रारंभिक परीक्षा (PT) में कथित अनियमितताओं को लेकर CID की जांच तेज हो गई है और कई जगहों पर छापेमारी हुई है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, आयोग के परीक्षा नियंत्रक ने बुधवार शाम एक आदेश जारी कर इस स्थगन की घोषणा की। आदेश में कहा गया है कि विज्ञापन संख्या 01/2026 के तहत होने वाली संयुक्त असैनिक सेवा मुख्य परीक्षा-2025 को "अपरिहार्य कारणों" से टाला जा रहा है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि 9 जुलाई 2026 को जारी परीक्षा कैलेंडर की अन्य सभी प्रस्तावित परीक्षाएं भी फिलहाल रोक दी गई हैं। विस्तृत जानकारी के लिए उम्मीदवारों को JPSC की आधिकारिक वेबसाइट देखने की सलाह दी गई है।
क्यों और कैसे हुई जांच की कार्रवाई?
यह स्थगन सीधे तौर पर 14वीं JPSC PT परीक्षा परिणाम से जुड़े विवादों से जुड़ा है। मंगलवार को CID और रांची पुलिस की एक संयुक्त टीम ने JPSC मुख्यालय, परीक्षा कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल (TSR Data Processing Private Limited) के दफ्तर समेत कुल आठ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के बाद आठ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
हिरासत में लिए गए प्रमुख लोग: हिरासत में लिए गए लोगों में JPSC की सहायक परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक सत्यपाल सिंह और रामबीर सिंह, तथा कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी शामिल हैं। इनके अलावा आयोग की गोपनीय शाखा और कंप्यूटर सेल से जुड़े तीन कर्मचारियों से भी पूछताछ चल रही है।
जांच के दायरे में क्या-क्या है?
छापेमारी के दौरान जांच एजेंसियों ने कंप्यूटर, सीपीयू, सर्वर डेटा, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, ओएमआर स्कैनिंग रिकॉर्ड और मेरिट लिस्ट से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं। CID मुख्य रूप से डिजिटल टैंपरिंग, ओएमआर डेटा में हेरफेर और डेटा ट्रांसफर जैसे पहलुओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है। सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है।
जांच का एक अहम बिंदु परीक्षा एजेंसी टीडीपीएल का चयन भी है। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने मई 2025 में इसी कंपनी को अनियमितताओं के चलते ब्लैकलिस्ट कर दिया था। इसके बावजूद JPSC द्वारा उसे परीक्षा का जिम्मा दिए जाने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
छात्रों के आरोप और आंदोलन
PT परीक्षा का परिणाम आने के बाद से ही अभ्यर्थी और छात्र संगठन लगातार विरोध कर रहे थे। उनके मुख्य आरोप थे कि कट-ऑफ मार्क्स जारी किए बिना रिजल्ट घोषित किया गया, मेरिट सूची पर किसी के हस्ताक्षर नहीं थे, और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी थी। इन्हीं शिकायतों और आंदोलनों के बाद राज्य सरकार ने मामले की CID जांच के आदेश दिए थे।
इनपुट: IANS



