शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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बोकारो से 6 साल से लापता किशोरी: हाईकोर्ट ने CBI को जांच में शामिल होने का दिया निर्देश, CID की मदद करेगी एजेंसी

झारखंड के बोकारो जिले से करीब छह साल से लापता एक नाबालिग लड़की के मामले में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) भी शामिल हो गया है। झारखंड हाईकोर्ट ने किशोरी की तलाश में हो रही देरी पर असंतोष जताते हुए CBI

बोकारो से 6 साल से लापता किशोरी: हाईकोर्ट ने CBI को जांच में शामिल होने का दिया निर्देश, CID की मदद करेगी एजेंसी
(फोटो: IANS)

झारखंड के बोकारो जिले से करीब छह साल से लापता एक नाबालिग लड़की के मामले में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) भी शामिल हो गया है। झारखंड हाईकोर्ट ने किशोरी की तलाश में हो रही देरी पर असंतोष जताते हुए CBI को इस मामले में पक्षकार बनाया है और राज्य की अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के साथ मिलकर जांच करने का निर्देश दिया है।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह आदेश न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने लड़की की मां उषा झा द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। अदालत ने केंद्रीय एजेंसी को अपनी तकनीकी विशेषज्ञता और संसाधनों का उपयोग कर CID की जांच में सहयोग करने को कहा है, ताकि लापता लड़की का जल्द से जल्द पता लगाया जा सके। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है।

सीआईडी जांच से असंतुष्ट कोर्ट

गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर गौर किया कि मामला CID को सौंपे जाने के बावजूद जांच काफी हद तक राज्य पुलिस के पुराने अनुसंधान तक ही सीमित रही है। खंडपीठ ने टिप्पणी की कि किशोरी को खोजने के लिए केंद्रीय एजेंसी की तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग आवश्यक लगता है। कोर्ट ने जांच में वैज्ञानिक तकनीक के बेहतर इस्तेमाल पर जोर देते हुए पुणे के एक मामले का जिक्र किया और GAIT सॉफ्टवेयर के उपयोग का भी निर्देश दिया।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला बोकारो जिले के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र का है, जहां से 14 वर्षीय किशोरी 16 अक्टूबर 2020 से लापता है। घटना के बाद उसकी साइकिल, चप्पलें और किताबें घटनास्थल के पास से बरामद हुई थीं। प्राथमिकी की सुपरविजन रिपोर्ट में इसे अपहरण का मामला माना गया था। लंबे समय तक जब स्थानीय पुलिस कोई ठोस सुराग नहीं जुटा पाई, तो परिजनों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद जांच CID को सौंपी गई थी।

एक अहम सुराग पर अटकी जांच

CID ने अदालत को बताया कि ई-केवाईसी मिलान के दौरान बिहार के गोपालगंज में एक लड़की का चेहरा लापता किशोरी से लगभग 90 प्रतिशत तक मेल खाता पाया गया है। हालांकि, फिंगरप्रिंट और अन्य पहचान संबंधी विवरण मेल नहीं खाने से उसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। गुरुवार की सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहितश्य राय, जबकि याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विसेंट रोहित मार्की और रितु नंदा उपस्थित हुए। CID के एडीजी और विशेष जांच दल (SIT) के अधिकारी भी अदालत में मौजूद थे।

इनपुट: IANS

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