हजारीबाग: सड़क हादसे में युवक की मौत के बाद ग्रामीणों का प्रदर्शन, NTPC का कोयला परिवहन रुका
झारखंड के हजारीबाग जिले में एक सड़क दुर्घटना में युवक की मौत के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है, जिससे एनटीपीसी (NTPC) का कोयला परिवहन पूरी तरह ठप हो गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, प्रद
झारखंड के हजारीबाग जिले में एक सड़क दुर्घटना में युवक की मौत के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है, जिससे एनटीपीसी (NTPC) का कोयला परिवहन पूरी तरह ठप हो गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने मृतक के परिवार के लिए मुआवजे और नौकरी की मांग करते हुए बड़कागांव क्षेत्र में परिवहन मार्ग को जाम कर दिया है, जिससे कोयला लदे वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं।
यह घटना शनिवार देर रात की है, जब चेपाकला पंचायत निवासी नरेश कुमार महतो कोयला लदे एक हाईवा की चपेट में आ गए। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। नरेश अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। इस हादसे के बाद ग्रामीणों ने शनिवार रात से ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जो रविवार को और तेज हो गया।
ग्रामीणों की मांगें और आरोप
चेपाकला पंचायत के मुखिया अनिकेत कुमार नायक के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कई मांगें रखी हैं। उनकी मुख्य मांगें हैं कि मृतक के आश्रित परिवार को 15 लाख रुपये का मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी और दुर्घटना के जिम्मेदार चालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे कोयला ढुलाई शुरू नहीं होने देंगे।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस मार्ग पर भारी संख्या में तेज रफ्तार से चलने वाले हाईवा वाहनों के कारण दुर्घटनाएं लगातार हो रही हैं। उनका कहना है कि प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं, जिससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की जान हमेशा खतरे में रहती है।
प्रशासन की कोशिशें और राजनीतिक प्रतिक्रिया
मामले की सूचना मिलते ही बड़कागांव के अंचलाधिकारी मनोज कुमार और थाना प्रभारी दीपक कुमार सिंह सहित पुलिस बल मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने और जाम हटाने की कोशिश की, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई सहमति नहीं बन पाई थी।
इस बीच, बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद भी घटनास्थल पर पहुंचीं और पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। हालांकि, उनके जाने के बाद भी ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे और आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी।
इनपुट: IANS



