उधमपुर एयरपोर्ट का विकास कार्य तेज़: टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में, अगस्त में निर्माण शुरू होने की उम्मीद
जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में प्रस्तावित एयरपोर्ट के निर्माण कार्य में तेज़ी आने की ख़बर है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी है कि टर्मिनल भवन के निर्म
जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में प्रस्तावित एयरपोर्ट के निर्माण कार्य में तेज़ी आने की ख़बर है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी है कि टर्मिनल भवन के निर्माण की टेंडर प्रक्रिया निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है और अगस्त के दूसरे सप्ताह तक ठेका (वर्क ऑर्डर) दिया जा सकता है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार परियोजना पर लगातार नज़र बनाए हुए है ताकि काम में कोई बेवजह की देरी न हो।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के माध्यम से इस परियोजना की मौजूदा स्थिति साझा की। उन्होंने बताया कि टर्मिनल निर्माण के लिए जारी टेंडर की तकनीकी निविदा (टेक्निकल बिड) 10 जुलाई को खोली गई थी, जिसमें कुल सात एजेंसियों ने हिस्सा लिया। अब अगला कदम वित्तीय निविदा (फाइनेंशियल बिड) खोलने का है, जिसके 22 जुलाई के आसपास होने की संभावना है।
दो चरणों में होगा विकास
अधिकारियों के मुताबिक, उधमपुर एयरपोर्ट का विकास दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण के तहत, नागरिक उड्डयन सेवाओं को जल्द से जल्द शुरू करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके लिए मौजूदा उधमपुर एयरफोर्स स्टेशन परिसर में एक अस्थायी टर्मिनल से व्यावसायिक उड़ानें शुरू की जाएँगी। अनुमान है कि यह सेवा अगले छह से सात महीनों में आम यात्रियों के लिए उपलब्ध हो सकती है।
दूसरे चरण में एयरपोर्ट का स्थायी और बड़े पैमाने पर विस्तार किया जाना है। इस व्यापक विस्तार के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) को अतिरिक्त ज़मीन की आवश्यकता होगी। प्राधिकरण ने जम्मू-कश्मीर सरकार से करीब 28 एकड़ अतिरिक्त भूमि मुहैया कराने का आग्रह किया है।
भविष्य की योजना और लक्ष्य
ज़मीन मिलने के बाद एक स्थायी टर्मिनल भवन बनाया जाएगा जो सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। अधिकारियों का कहना है कि इस विस्तार परियोजना को अगले तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। नए टर्मिनल में उन्नत यात्री सुविधाएँ, सुरक्षा प्रणाली, पार्किंग और अन्य ज़रूरी बुनियादी ढाँचे शामिल होंगे, जिससे भविष्य में बड़े यात्री विमानों का संचालन भी संभव हो सकेगा। केंद्र सरकार का मानना है कि यह परियोजना क्षेत्रीय संपर्क को मज़बूत करेगी और जम्मू-कश्मीर के विकास को गति देगी।
इनपुट: IANS



