पटना में जदयू का महाधिवेशन: नीतीश कुमार के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर लगी मुहर, 2025 की ऐतिहासिक जीत का जश्न
21 जून 2026 को पटना के कर्पूरी सभागार में जनता दल (यूनाइटेड) की राष्ट्रीय और राज्य परिषद का संयुक्त अधिवेशन हुआ। इस दौरान नीतीश कुमार के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर औपचारिक मुहर लगाई गई। साथ ही, 2025 के विधानसभा चुनाव में 101 में से 85 सीटें जीतने की ऐतिहासिक सफलता पर चर्चा की गई।
पटना (बिहार): जनता दल (यूनाइटेड) के संगठनात्मक ढांचे और भविष्य की राजनीतिक दिशा को तय करने के लिए 21 जून 2026 को राजधानी पटना में एक विशाल आयोजन किया गया। प्रदेश मुख्यालय स्थित कर्पूरी सभागार में आयोजित राष्ट्रीय और राज्य परिषद के इस संयुक्त अधिवेशन में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सर्वसम्मति से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वीकार करते हुए उनके नाम पर औपचारिक मुहर लगा दी गई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 के विधानसभा चुनावों में मिली प्रचंड जीत के बाद यह जदयू का पहला सबसे बड़ा राष्ट्रीय जमावड़ा था, जिसमें देश भर के दिग्गज नेताओं ने शिरकत की।
अधिवेशन का स्वरूप: दो अलग-अलग सत्रों में बंटा कार्यक्रम
पार्टी की अंदरूनी रणनीति और सांगठनिक फैसलों को व्यवस्थित रूप देने के लिए इस पूरे आयोजन को दो प्रमुख हिस्सों में विभाजित किया गया था।
- प्रथम सत्र (राज्य परिषद): दिन की शुरुआत प्रदेश स्तरीय मंथन के साथ हुई। इस सुबह वाले सत्र में मुख्य रूप से निवर्तमान पदाधिकारी और बिहार प्रदेश के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। यहां राज्य स्तर की नीतियों और भविष्य की कार्ययोजनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।
- द्वितीय सत्र (राष्ट्रीय परिषद): दोपहर 3:30 बजे से कार्यक्रम का मुख्य चरण आरंभ हुआ। यह राष्ट्रीय परिषद का अहम सम्मेलन था, जिसमें देश भर से आए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और रणनीतिक निर्णयों का अनुमोदन किया गया।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार सुबह के प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम में उपस्थित नहीं थे। वे सीधे दोपहर में राष्ट्रीय परिषद के मुख्य आयोजन में पहुंचे, जहां उनके नेतृत्व को लेकर आधिकारिक अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी की गई। इसी दौरान प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा को उनके पद पर दोबारा जिम्मेदारी सौंपे जाने की संभावनाओं पर भी मुहर लगने की रूपरेखा तय हुई।
2025 के विधानसभा चुनाव: ऐतिहासिक स्ट्राइक रेट की गूंज
इस महासम्मेलन का एक बड़ा हिस्सा पार्टी की हालिया चुनावी सफलताओं के जश्न पर केंद्रित रहा। आंकड़ों पर गौर करें तो 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू ने सीमित लेकिन बेहद सटीक रणनीति के तहत 101 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। इनमें से 85 सीटों पर पार्टी ने शानदार विजय हासिल की।
प्रतिशत के नजरिए से यह 84.16 फीसदी की सफलता दर है, जिसे जनता दल (यूनाइटेड) के अब तक के राजनीतिक इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जा रहा है। मोकामा से विधायक अनंत सिंह ने इस मौके पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बाद आयोजित यह सबसे बड़ा कार्यक्रम है, जो संगठन की बढ़ती ताकत का सीधा प्रमाण है।
निशांत कुमार का राष्ट्रीय मंच पर पदार्पण
इस आयोजन की एक और खास बात युवा चेहरों को मिल रही तरजीह रही। बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री का जिम्मा संभाल रहे निशांत कुमार पहली बार पार्टी की राष्ट्रीय परिषद के मंच पर नजर आए। उन्होंने इस दौरान एक विशेष संबोधन भी दिया। राजनीतिक विश्लेषकों के नजरिए से उनका यह पदार्पण पार्टी के भीतर अगली पीढ़ी के नेताओं को आगे लाने की दिशा में एक अहम कदम है।
दिग्गजों की मौजूदगी और पटना का माहौल
राजधानी पटना का सियासी पारा इस आयोजन के चलते काफी चढ़ा हुआ था। जदयू प्रदेश कार्यालय के बाहर से लेकर शहर की तमाम मुख्य सड़कों और चौराहों को बड़े-बड़े बैनरों तथा होर्डिंग्स से पाट दिया गया था।
कार्यक्रम में शिरकत करने वालों की सूची काफी लंबी और प्रभावशाली थी। देशभर से आए राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों, विभिन्न राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों और सांसदों ने इसमें अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मंच पर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) और रामनाथ ठाकुर जैसे कद्दावर नेता मौजूद थे। इनके साथ ही बिहार के दोनों उपमुख्यमंत्री—बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी—तथा राष्ट्रीय महासचिव आफाक अहमद ने भी सांगठनिक और रणनीतिक निर्णयों की समीक्षा में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।
पदाधिकारियों का उत्साह और आगे की राह
नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच इस आयोजन को लेकर भारी जोश देखा गया। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने दावा किया कि हाल ही में संपन्न हुए सांगठनिक चुनावों के बाद यह पहला वृहद राष्ट्रीय सम्मेलन है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन को लेकर जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक में खासा उत्साह है।
वहीं, प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने इस जमावड़े को राज्य और राष्ट्रीय परिषद के लिए एक 'ऐतिहासिक क्षण' करार दिया। कुल मिलाकर, कर्पूरी सभागार में हुआ यह आयोजन केवल पदों के अनुमोदन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए पार्टी की एकजुटता और नई ऊर्जा का प्रदर्शन भी साबित हुआ।



