जेवलिन मिसाइल सौदा: विशेषज्ञ ने 'मेक इन इंडिया' के तहत अमेरिकी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की शर्त पर दिया जोर
भारत द्वारा अमेरिका से जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल खरीदने की योजना पर विदेश मामलों के विशेषज्ञ डॉ. वाइल अव्वाद ने अपनी राय रखी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उन्होंने इस सौदे को भारत के लिए महत्वपूर्ण…
भारत द्वारा अमेरिका से जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल खरीदने की योजना पर विदेश मामलों के विशेषज्ञ डॉ. वाइल अव्वाद ने अपनी राय रखी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उन्होंने इस सौदे को भारत के लिए महत्वपूर्ण तो बताया, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठाया कि क्या यह सिर्फ एक खरीदार-विक्रेता के रिश्ते तक सीमित रहेगा या एक रणनीतिक गठबंधन में तब्दील होगा।
डॉ. अव्वाद ने इस बात पर जोर दिया कि भारत 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत निवेश चाहता है। उन्होंने कहा, "यदि अमेरिकी हथियारों और गोला-बारूद की खरीद के साथ 'मेक इन इंडिया' निवेश होता है, तो उसमें प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण भी होना चाहिए। फिलहाल किसी भी अमेरिकी कंपनी को भारत को तकनीक ट्रांसफर करने के लिए आगे आते नहीं देखा गया है।''
भारत की वैश्विक स्थिति और कूटनीति
भारत की विदेश नीति पर टिप्पणी करते हुए डॉ. अव्वाद ने कहा कि देश अब अपने हथियारों के स्रोतों में विविधता ला रहा है। उन्होंने बताया कि भारत की 60% सैन्य आपूर्ति अभी भी रूस से होती है, लेकिन हाल के वर्षों में फ्रांस, इटली, ब्रिटेन, अमेरिका और इजराइल से भी बड़े पैमाने पर खरीद की गई है। उनके मुताबिक, यह नया हथियार भारत के शस्त्रागार को मजबूत करेगा, जिससे देश सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक रूप से और सशक्त होगा।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और ब्रिक्स (BRICS) जैसे संगठनों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि SCO, G7 और ब्रिक्स जैसे मंचों पर भारत की उपस्थिति उसकी मजबूत वैश्विक स्थिति को दर्शाती है और यह संकेत है कि दुनिया अब एकध्रुवीय नहीं रही। प्रधानमंत्री मोदी के किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान दौरे को उन्होंने इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।
अन्य क्षेत्रीय मुद्दे
डॉ. अव्वाद ने अन्य अहम मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्कों के प्रभाव के कारण भारत अपने MSME क्षेत्र के लिए नए बाजार तलाश रहा है। इस क्रम में, पाकिस्तान को दरकिनार कर चाबहार बंदरगाह के रास्ते सीआईएस देशों तक सीधी पहुंच बनाना भारत का एक प्रमुख उद्देश्य है।
नेपाल में हुई आपदा पर उन्होंने कहा कि इसे केवल मानवीय नजरिए से नहीं, बल्कि क्षेत्रीय पर्यावरण के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि चीन, भारत और नेपाल समेत सभी हिमालयी देशों को मिलकर एक बेहतर पूर्व-चेतावनी प्रणाली विकसित करनी चाहिए थी। उन्होंने बताया कि सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि लगभग 1200 टन बर्फ का एक बड़ा टुकड़ा गिरने से तबाही बढ़ी, जिसमें मृतकों की संख्या 1500 के पार जा सकती है।
इनपुट: IANS



