भारत में 5G की रफ़्तार और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर दुनिया के लिए मिसाल: GSMA
भारत जिस तेज़ी से 5G तकनीक को अपना रहा है और अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को मज़बूत कर रहा है, वह पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन गया है। मोबाइल ऑपरेटरों के वैश्विक संगठन GSMA के चेयरमैन…
भारत जिस तेज़ी से 5G तकनीक को अपना रहा है और अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को मज़बूत कर रहा है, वह पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन गया है। मोबाइल ऑपरेटरों के वैश्विक संगठन GSMA के चेयरमैन गोपाल विट्टल के अनुसार, भारत अपने विशाल पैमाने, प्रतिभा और महत्वाकांक्षा के दम पर यह दिखा रहा है कि कैसे समावेशी विकास को गति दी जा सकती है और अगली कनेक्टिविटी क्रांति को दिशा दी जा सकती है।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, GSMA बोर्ड ने पिछले सप्ताह नई दिल्ली में एक बैठक की, जिसमें कनेक्टिविटी के भविष्य की प्राथमिकताएं तय की गईं। विट्टल ने बुधवार को कहा कि वैश्विक मानकों पर काम करने और विभिन्न बाज़ारों के बीच सहयोग बढ़ाने से नवाचार में तेज़ी लाई जा सकती है। इससे विश्वास और मज़बूती बढ़ेगी, साथ ही यह भी सुनिश्चित होगा कि कनेक्टिविटी का लाभ दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचे।
भारत: मोबाइल कनेक्टिविटी का पावरहाउस
GSMA ने एक बयान में बताया कि आज भारत में 1.2 अरब सक्रिय मोबाइल कनेक्शन हैं, जिनमें से 45 करोड़ कनेक्शन 5G पर हैं। ये आँकड़े देश की तेज़ी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था को ताक़त दे रहे हैं। बैठक के दौरान GSMA बोर्ड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भारत सरकार और उद्योग जगत के कई प्रमुख नेताओं से भी मुलाकात की। संगठन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत में 5G की तीव्र तैनाती लगातार निवेश और एक स्पष्ट बाज़ार दृष्टि का नतीजा है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मोबाइल तकनीक का प्रभाव
वैश्विक स्तर पर मोबाइल तकनीक और सेवाओं का आर्थिक योगदान बहुत बड़ा है। साल 2025 में इनसे 6 ट्रिलियन डॉलर का आर्थिक मूल्य पैदा हुआ, जो दुनिया की कुल GDP का 6.4% है। अनुमान है कि यह योगदान 2030 तक बढ़कर 11.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच जाएगा। भविष्य को देखते हुए, यह अनुमान लगाया गया है कि 2030 तक दुनिया के 57% मोबाइल कनेक्शन 5G पर आधारित होंगे। इसे साकार करने के लिए मोबाइल ऑपरेटर 2025 से 2030 के बीच नेटवर्क विस्तार और अपग्रेडेशन पर 1.2 ट्रिलियन डॉलर का भारी-भरकम निवेश करेंगे।
भविष्य की चुनौतियाँ और अवसर
GSMA के महानिदेशक विवेक बद्रीनाथ ने कहा, "भारत इस बात का एक ठोस उदाहरण है कि जब नीतिगत सुधार मोबाइल इंफ्रास्ट्रक्चर में अधिक निवेश को सक्षम बनाते हैं तो उसके क्या लाभ मिलते हैं।" उन्होंने आगे कहा कि अगली प्राथमिकता 5G के विस्तार को वास्तविक मूल्य में बदलना और यह सुनिश्चित करना है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोग डिजिटल अर्थव्यवस्था का लाभ उठा सकें। इसके लिए लगातार निवेश, सहयोगी नीतियों और पूरे इकोसिस्टम में बेहतर तालमेल की ज़रूरत होगी। बैठक में ऑनलाइन धोखाधड़ी के बढ़ते वैश्विक खतरे पर भी चर्चा हुई, जिससे निपटने के लिए GSMA ने 'यूनाइटेड अगेंस्ट स्कैम्स' कार्यक्रम शुरू किया है।
इनपुट: IANS



