जम्मू-कश्मीर: स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे MBBS और BDS इंटर्न डॉक्टर
जम्मू-कश्मीर में MBBS और BDS की इंटर्नशिप कर रहे डॉक्टर अपने मासिक स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा 12,300 रुपये की राशि देश के अन्य राज्यों की…
जम्मू-कश्मीर में MBBS और BDS की इंटर्नशिप कर रहे डॉक्टर अपने मासिक स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा 12,300 रुपये की राशि देश के अन्य राज्यों की तुलना में बहुत कम है और इसे बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रतिमाह किया जाना चाहिए। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों ने अपनी मांगों पर लगभग तीन साल से कोई कार्रवाई न होने के बाद यह कदम उठाया है।
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि वे मरीजों की सेवा करना चाहते हैं, लेकिन सरकार की तरफ से उनकी जायज मांगों पर ध्यान न दिए जाने के कारण उन्हें अपनी ड्यूटी छोड़कर प्रदर्शन के लिए मजबूर होना पड़ा है। उनका कहना है कि वार्ड, ओपीडी और अस्पतालों में मरीजों के भारी दबाव के बीच वे बड़ी जिम्मेदारी निभाते हैं, लेकिन इसके बदले मिलने वाला स्टाइपेंड उनकी मेहनत के अनुरूप नहीं है।
क्या हैं डॉक्टरों की मुख्य मांगें?
इंटर्न डॉक्टरों की दो प्रमुख मांगें हैं। डॉ. तनिष के अनुसार, पहली मांग यह है कि मौजूदा 12,300 रुपये के स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30,000 रुपये किया जाए, ताकि यह अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बराबर हो सके। उनकी दूसरी मांग स्टाइपेंड में नियमित और समयबद्ध संशोधन के लिए एक स्थायी व्यवस्था बनाने की है। उन्होंने कहा, "महंगाई लगातार बढ़ रही है, ऐसे में स्टाइपेंड में भी समय-समय पर बदलाव होना चाहिए।"
एक अन्य इंटर्न डॉक्टर ने IANS को बताया कि स्टाइपेंड बढ़ाने का प्रस्ताव लगभग तीन साल से लंबित है, जिसमें इसे बढ़ाकर करीब 26,000 रुपये करने की सिफारिश की गई थी, लेकिन उस पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
'बातचीत से हल न निकलने पर आंदोलन'
डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने आंदोलन का रास्ता चुनने से पहले सभी प्रशासनिक और कानूनी माध्यमों का इस्तेमाल किया। डॉ. तनिष ने बताया कि कई अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी मांगें रखी गईं, लेकिन जब कोई समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को आखिरी विकल्प के तौर पर चुना गया।
वहीं, प्रदर्शन कर रहे डॉ. शाहनवाज ने जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य मंत्री, उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की। उन्होंने उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी स्टाइपेंड पहले से ही अधिक था और अब उसमें और वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा कि यह चिंता का विषय है कि डॉक्टरों को अपनी जायज मांगों के लिए सड़क पर बैठना पड़ रहा है।
इनपुट: IANS



