मंगलवार, 8 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
देश

जम्मू-कश्मीर: डोडा के एक गांव में गोबर से जल रहे 15 घरों के चूल्हे, जैविक खाद से भी कमाई

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में एक अभिनव पहल ग्रामीणों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। यहां सरकार की गोवर्धन योजना के तहत स्थापित एक यूनिट गाय के गोबर से न केवल खाना पकाने के लिए बायोगैस बना रही है…

जम्मू-कश्मीर: डोडा के एक गांव में गोबर से जल रहे 15 घरों के चूल्हे, जैविक खाद से भी कमाई
(फोटो: IANS)

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में एक अभिनव पहल ग्रामीणों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। यहां सरकार की गोवर्धन योजना के तहत स्थापित एक यूनिट गाय के गोबर से न केवल खाना पकाने के लिए बायोगैस बना रही है, बल्कि जैविक खाद का उत्पादन भी कर रही है, जिससे ग्रामीणों को दोहरी आमदनी का रास्ता मिला है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्लांट स्वच्छ और आत्मनिर्भर ऊर्जा का एक सफल मॉडल बनकर उभरा है।

विज्ञापन

फिलहाल यह प्रोजेक्ट ट्रायल के तौर पर चल रहा है और इससे 15 घरों को सीधे रसोई गैस की आपूर्ति की जा रही है। एक लाभार्थी ने एजेंसी को बताया कि यह योजना उनके गांव के लिए किसी "उपहार" से कम नहीं है, क्योंकि अब उन्हें खाना पकाने के लिए लकड़ियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा, "हमने कभी नहीं सोचा था कि घर बैठे मुफ़्त में गैस मिल जाएगी।"

सब्सिडी और आत्मनिर्भरता

इस प्रोजेक्ट की सफलता का एक बड़ा कारण सरकार द्वारा दी जा रही 100 प्रतिशत सब्सिडी है। सहायक विकास आयुक्त (ACD) मोहम्मद अफाकी ने बताया कि लगभग 40 लाख रुपये के बजट वाला यह ट्रायल प्रोजेक्ट पूरी तरह सफल रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, हर घर से सुबह गोबर इकट्ठा करके प्लांट में डाला जाता है, जिससे दिन भर के लिए गैस उपलब्ध हो जाती है। लाभार्थी ने कहा, "बाहर देशों में युद्ध से गैस की परेशानी हुई, लेकिन हमें कोई दिक्कत नहीं हुई।"

भविष्य की योजनाएं और आर्थिक लाभ

इस बायोगैस प्लांट की कुल क्षमता 25 से 30 घरों को गैस आपूर्ति करने की है, जिसे गोबर की मात्रा बढ़ाकर 35 घरों तक पहुंचाया जा सकता है। इससे भी बड़ा आर्थिक लाभ प्लांट से निकलने वाले अपशिष्ट से हो रहा है। लाभार्थी के अनुसार, "एक तरफ हम गोबर डालते हैं, तो दूसरी तरफ कंपनियों के फोन आ रहे हैं कि वे इसकी वेस्टेज (जैविक खाद) 25 रुपये प्रति किलो के भाव से खरीदेंगे।" इस खाद का इस्तेमाल खेतों में भी किया जा सकता है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी। मोहम्मद अफाकी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की सफलता को देखते हुए भविष्य में जिले के अन्य ब्लॉकों में भी ऐसी इकाइयां स्थापित करने की योजना है, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशियों की बड़ी संख्या के कारण गोबर आसानी से उपलब्ध है।

इनपुट: IANS

N

News4Social नेशनल डेस्क

News4Social नेशनल डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से राष्ट्रीय घटनाक्रम से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →